Diet after heart attack – हार्ट अटैक के बाद क्या खाना चाहिए

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हार्ट अटैक के मरीज़ को क्या खाना चाहिए – Diet after heart attack Recovery

  • हार्ट अटैक के बाद स्वस्थ खान पान से दिल की समस्याओं के अपने जोखिम को ठीक करने, और दोबारा हार्ट अटैक को रोकने में मदद मिलती है।
  • दिल की बीमारी में स्वस्थ्य खाने का चयन करना और उसका पालन करना बहुत आसान है , आपको बस इसकी जानकारी होने चाहिए की कौनसी खाने पीने की चीजें दिल की बीमारी के लिहाज़ से लाभदायक हैं|
  • आपके लिए ये भी जानना ज़रूरी होता है कि कौन सी खाने पीने की चीजें हार्ट अटैक के बाद हानिकारक हो सकती हैं|
  • अगर आपको दिल का दौरा पड़ा है, तो अपने आहार में कम से कम नमक का इस्तेमाल करें और संतृप्त वसा का बिलकुल इस्तेमाल न करें या बहुत ही कम मात्रा में करें।
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विषय सूची :-

  1. हार्ट अटैक के बाद क्या खाएं – Healthy eating diet after heart attack
  2. दिल के मरीज़ो में सब्जियों का इस्तेमाल – Use of fresh vegetables is a Heart healthy diet
  3. साबुत अनाज खाने के फायदे – Benefits of whole grains in diet after heart attack
  4. दिल के मरीजों में मछली खाने के फायदे – Benefits of Omega 3 fatty acids in heart disease
  5. हार्ट अटैक में बेरी खाने के फायदे – Berries the best fruits to eat after heart attack
  6. दिल की सेहत के लिए सबसे अच्छे तेल – 6 Best cooking oils for heart patient
  7. ह्रदय की बीमारी में क्या न खाएं – 12 foods to avoid after a heart attack
  8. दिल के मरीजों के लिए सुबह का नाश्ता – List of Best healthy breakfast
  9. मध्य भोजन(सुबह नाश्ते के 2-3 घंटे बाद क्या खाएं) – Mid- meal chart for cardiac patient
  10. हार्ट के मरीजों के लिए दोपहर का खाना – Best Indian lunch recipes after heart attack
  11. दिल के मरीजों को शाम के नाश्ते में क्या खाना चाहिए – Best healthy snacks for heart patient
  12. दिल के मरीज़ को रात के खाने में क्या खाना चाहिए ? – Best heart healthy dinner recipes
  13. हार्ट अटैक के बाद की सावधानी – Precautions after heart attack
  14. दिल का दौरा – Heart attack in Hindi
  15. हार्ट अटैक के कारण , लक्षण , बचाव और इलाज के बारे में
  16. ह्रदय सम्बंधित छाती के दर्द और गैर ह्रदय सम्बंधित छाती के दर्द की पहचान
  17. 10 दिनों में वज़न कम करने का डाइट प्लान – 10 days diet plan for weight loss in Hindi
Healthy eating after a heart attack
Healthy eating after a heart attack

संतृप्त वसा के कुछ उदाहरण – List of high saturated fat that should not be used in diet after heart attack

  • घी – Ghee
  • मक्खन – Butter
  • मांस में मौजूद चर्बी – Meat Fat
  • चीज़ – Cheese
  • क्रीम – Cream
  • कोकोनट का तेल – Coconut oil
  • ताड़ का तेल – Palm oil
  • चमड़ी सहित चिकेन – Poultry with skin आदि

और पढ़ें:- ह्रदय सम्बंधित छाती के दर्द और गैर ह्रदय सम्बंधित छाती के दर्द की पहचान

Also read:- Difference between Cardiac and Non Cardiac chest pain

और पढ़ें:- हार्ट अटैक के कारण , लक्षण , बचाव और इलाज के बारे में

हार्ट अटैक के बाद क्या खाएं – Healthy eating diet after heart attack

fruits to eat after heart attack

हार्ट अटैक के बाद जल्दी रिकवरी के लिए आहार निम्नलिखित हैं – (Best foods to eat after a heart attack)-जैसे –

दिल के मरीज़ो में सब्जियों का इस्तेमाल – Use of fresh vegetables is a Heart healthy diet

  • पालक और तमाम ताज़ी हरी पत्तेदार सब्जियां – Spinach and other fresh green vegetables
  • ब्रोकोली – Broccoli
  • टमाटर – Tomatoes
  • गोभी – Cauliflower
  • गाजर – Carrots
  • एस्परैगस – Asparagus
  • बेल मिर्च – Bell peppers आदि

खास बातहरी पत्तेदार सब्जियां विटामिन-K और नाइट्रेट्स से भरपूर होती हैं, जो रक्तचाप को कम करने और धमनी के कार्य में सुधार करने में मदद कर सकती है| हरी पत्तेदार सब्जियों का ज्यादा सेवन करने से ह्रदय रोग में कमी अथवा दोबारा होने कि सम्भावना कम हो जाती है|

साबुत अनाज खाने के फायदे – Benefits of whole grains in diet after heart attack

  • साबुत अनाज उसको कहते हैं जिसमे चोकर, रोगाणु और इंडोस्पर्म तीनो साबुत रहते हैं उन्हें हटाया नहीं जाता है |

बहुत सारे अध्ययन से ये प्रमाणित हो चुका है कि साबुत अनाज के इस्तेमाल से ह्रदय सम्बंधित समस्या को कम किया जा सकता है |

साबुत अनाज की सूची – List of whole grains the healthy heart foods जैसे-

  • जौ – Barley
  • ब्राउन राइस – Brown rice
  • साबुत गेहू की रोटी – Whole wheat bread
  • बाजरा – Millet
  • दलिया – Oatmeal
  • मकई का लावा – Popcorn आदि

खास बातसाबुत अनाज खाने से कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर नियंत्रण में होने के साथ साथ ह्रदय रोग होने का खतरा कम होता है|

दिल के मरीजों में मछली खाने के फायदे – Benefits of Omega 3 fatty acids in heart disease – How eating fish helps your heart

  • मछलियों में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड्स ह्रदय के स्वास्थय के लिए बहुत ही लाभदायक होता है|
  • ओमेगा-3 फैटी एसिड आप अपने आहार में वसायुक्त मछली शामिल करके या फिश आयल का उपयोग करके इससे होने वाले लाभ प्राप्त कर सकते हैं |

खास बातवसायुक्त मछली और मछली का तेल दोनों ही ओमेगा-3 फैटी एसिड्स से भरपूर होते हैं और इनका उपयोग करके बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल , ट्राइग्लिसराइड, हाई ब्लड प्रेशर सहित ह्रदय रोगों के जोखिम कारकों को कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं |

इसके अलावा अखरोट , बादाम, लहसुन , ओलिव आयल , अंकुरित दालें , फलियाँ , ग्रीन टी, ताज़े और कम मीठे फलों का ज्यादा इस्तेमाल ह्रदय रोग , हाई ब्लड प्रेशर और तमाम तरह कि बिमारियों से बचने में मदद करती हैं |

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हार्ट अटैक में बेरी खाने के फायदे – Berries the best fruits to eat after heart attack

  • स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी, ब्लैकबेरी और रास्पबेरी महत्वपूर्ण पोषक तत्वों के साथ जाम से भरे होते हैं जो हृदय स्वास्थ्य में मुख्य भूमिका निभाते हैं।
Berries  the heart healthy diet

बेरियाँ एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती हैं जो तनाव और सुजन को दूर करती है जिनका ह्रदय रोग में विशेष योगदान होता है |

दिल की सेहत के लिए सबसे अच्छे तेल – 6 Best cooking oils for heart patient

दिल के मरीजों के लिए 6 सबसे अच्छे खाने के तेल – 6 Healthiest cooking oil for heart patient जैसे –

  1. जैतून का तेल – Olive oil
  2. सूरजमुखी का तेल – Sunflower oil
  3. कुसुम तेल – Safflower oil
  4. सोयाबीन का तेल – Soybean oil
  5. मूंगफली का तेल – Peanut oil
  6. चावल के चोकर का तेल – Rice bran oil

ये दिल के मरीजों के लिए लाभदायक तेल हैं , इनके निरंतर उपयोग से ह्रदय सम्बंधित रोगों को कम करने और कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखने में काफी मदद मिलती है |

जैतून का तेल – Olive oil

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olive oil

ओलिव आयल के फायदे – Benefits of olive oil

  • जैतून का तेल ओलिक एसिड नामक मोनोसचुरेटेड फैट से समृद्ध होता है। इस फैटी एसिड के कई लाभकारी प्रभाव होते हैं इसलिए खाना पकाने के लिए यह एक स्वस्थ विकल्प है।
  • जैतून का तेल ह्रदय के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है |

सूरजमुखी का तेल – Sunflower oil

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sunflower oil

सूरजमुखी के तेल के फायदे – Benefits of sunflower oil

  • स्वस्थ खाना पकाने का तेल ऐसा होना चाहिए जो मोनोअनसैचुरेटेड वसा में समृद्ध हो,जो की सूरजमुखी तेल में भरपूर मात्रा में पाया जाता है|
  • सूरजमुखी का तेल बेहद हल्का होता है और पचने में आसान होता है। सूरजमुखी तेल में ऐसे गुण भी होते हैं जो कब्ज को रोकने में मदद कर सकते हैं और पाचन तंत्र को मज़बूत करते हैं |
  • मोनोअनसैचुरेटेड वसा ह्रदय रोग और कोलेस्ट्रॉल को कम करने में लाभकारी सिद्ध होता है|

कुसुम तेल – Safflower oil

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Safflower oil

सैफफ्लावर आयल के फायदे – Benefits of safflower oil

  • कुसुम के तेल में असंतृप्त फैटी एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है|
  • इसके स्वाद की खास बात  ये है कि ये हर तरह के व्यंजनों के साथ अच्छी तरह से मिल जाता है।
  • मोनोअनसैचुरेटेड वसा को कई अन्य खाना पकाने वाले तेलों की तुलना में उच्च तापमान तक गर्म किया जा सकता है।

सोयाबीन का तेल – Soybean oil

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Soybean oil

सोयाबीन के तेल के फायदे – Benefits of soybean oil

  • सोयाबीन के तेल में ज्यादातर पॉलीअनसेचुरेटेड वसा होते हैं, कोलेस्ट्रॉल के स्तर कम करते हैं और हृदय रोग के जोखिम को भी कम करते हैं।
  • ये तेल ओमेगा 3 फैटी एसिड्स से भरपूर होता है जो ह्रदय के लिए बहुत लाभकारी होता है |
  • सोयाबीन का तेल विटामिन K से भरपूर होता है, जो हड्डियों की मजबूती बनाए रखने और फ्रैक्चर के खतरे को कम करने में भी मदद कर सकता है।

मूंगफली का तेल – Peanut oil

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Peanut oil

पीनट आयल के फायदे – Benefits of peanut oil

  • मूंगफली का तेल मोनोअनसैचुरेटेड वसा में उच्च होता है और संतृप्त वसा में कम होता है,जो हृदय रोग और कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है।
  • मूंगफली का तेल कभी-कभी गठिया, जोड़ों का दर्द, सूखी त्वचा, एक्जिमा और अन्य त्वचा की बिमारियों के लिए त्वचा पर लगाया जाता है।

चावल के चोकर का तेल – Rice bran oil

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Rice bran oil

चोकर के तेल के फायदे – Benefits of rice bran oil

  • राइस ब्रान ऑयल हमारी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को प्रभावी बना सकता है, जो कि हमारे शरीर में बैक्टीरिया, वायरस और अन्य रोग पैदा करने वाले जीवों से बचाव के लिए सबसे ज़रूरी है|
  • राइस ब्रान ऑयल कोलेस्ट्रॉल के स्तर में सुधार करके हृदय रोग के जोखिम को कम कर सकता है।

दिल की बीमारी में क्या न खाएं – 12 foods to avoid after a heart attack

  1. संतृप्त वसा – Saturated fat (सूची ऊपर है)
  2. रेड मीट – Beef
  3. सोडा – Soda
  4. तली हुयी चीजें – Fried food
  5. वाइट राइस ब्रेड – White rice bread
  6. पिज़्ज़ा – Pizza
  7. शराब – Alcohol
  8. साबुत दूध का दही – Whole milk yogurt
  9. फ्रेंच फ्राइज – French fries
  10. फ्राइड चिकेन – Fried chicken
  11. आइसक्रीम – Ice-cream
  12. पोटैटो चिप्स – Potato chips आदि |

दिल के मरीज़ के लिए खाने की सूची – Best diet chart 2019

दिल के मरीजों के लिए सुबह का नाश्ता – List of Best healthy breakfast in India for heart patient (7 to 8 AM)

  • 2 अंडे की सफेदी के साथ सलाद + 1 गिलास ऑरेंज जूस या
  • 2 गेहू या जौ की रोटी + आधी कटोरी सब्ज़ी + 1 गिलास दूध (क्रीम निकला हुआ) या
  • दलिया उपमा +1/2 कप सब्ज़ी ( प्याज, टमाटर, हरी मटर, गाजर) +1 गिलास दूध (क्रीम निकला हुआ) या 1 कप चाय या
  • 2 पराठा (आलू /मेथी/गोभी) + 2 चम्मच हरी चटनी + 1 गिलास दूध 1 कप चाय
  • 2 इडली + सांबर (1 कप) या
  • 1 कप पोहा + रायता (1/2 कप) या
  • 2 बेसन का चीला + रायता (1/2 कप) या
  • सोया और गेहूं का डोसा + 2 चम्मच पुदीना चटनी + 1 गिलास दूध (क्रीम निकला हुआ) या 1 कप चाय या
  • 1 कप दलिया +1 गिलास दूध (क्रीम निकला हुआ)

और पढ़ें – सीने में दर्द के कारण , लक्षण , बचाव और इलाज के बारे में

Also read –About Heart attack , causes, symptoms, prevention and treatment

पढ़ें :- 10 दिनों में वज़न कम करने का डाइट प्लान – 10 days diet plan for weight loss in Hindi

मध्य भोजन(सुबह नाश्ते के 2-3 घंटे बाद क्या खाएं) – Mid- meal chart for cardiac patient – Heart healthy fruits (10 – 11 AM)

  • 1 केला / सेब/अनार/नासपाती/संतरा /बेरियाँ / में से कोई एक या
  • 1 कप फलों का सलाद या 100 ग्राम तरबूज या खरबूज (कलिंगर)

हार्ट के मरीजों के लिए दोपहर का खाना – Best Indian lunch recipes after heart attack(1:30 to 2 PM)

  • 1 कप ब्राउन राइस + 2 रोटी + 1/2 कप दाल + 1/2 कप सब्ज़ी + 1 गिलास छाछ या
  • 1 कप ब्राउन राइस + 2 ज्वार की रोटी + 1/2 कप टमाटर दाल + 1/2 कप सेम या हरे मटर कि सब्ज़ी + 1 गिलास छाछ या
  • 2 चपाती + राजमा (1 कप) + नीम्बू पानी बिना नमक का या
  • 4 बाजरे की रोटी + 1/2 कप लौकी दाल + 1/2 कप शिमला मिर्च की सब्जी + 1 गिलास छाछ या
  • 2 चपाती + मिक्स दाल (1 कप) + नीम्बू पानी बिना नमक का
  • 1 कप ब्राउन राइस + 2 बाजरे की रोटी + 1/2 कप मैथी दाल + 1/2 कप मिली हुयी सब्जियां + 1 गिलास छाछ या
  • 1 कप सफेद चावल + 2 रोटी + 100 ग्राम मछली + 1/2 कप कद्दू की सब्ज़ी या
  • 2 चपाती + मिक्स दाल (1 कप) + नीम्बू पानी बिना नमक का या
  • 4 रोटी + 1/2 कप पालक दाल + 1/2 कप करेले की सब्जी + 1 गिलास छाछ या
  • 2 चपाती + चने की सब्जी 1/2 कप +मूंग दल 1 कप या
  • 2 चपाती + चिकन करी (1 कप)+1 कप ब्राउन राइस + 1 चुप्प मूंग दाल

दिल के मरीजों को शाम के नाश्ते में क्या खाना चाहिए – Best healthy snacks for heart patient(4 – 4:30 PM )

  • भेलपुरी / मुर मुरे चाट 1/2 कप या
  • भुना हुआ चना 1/2 कप या
  • बादाम 4 + काजू 4 + 4 किशमिश या
  • अंकुरित दालों का सलाद या
  • 1 गिलास बिना क्रीम का दूध और 2-3 बिस्कुट या
  • 1 कप उबली हुयी अंकुरित दालें + ग्रीन टी या
  • अखरोट4 + बादाम 5 + किशमिश 6 + 1 कप ग्रीन टी

दिल के मरीज़ को रात के खाने में क्या खाना चाहिए ? – Best heart healthy dinner recipes (समय – 8 – 9 pm)

Mixed veg salad for heart patient
  • 2 चपाती + गाजर और चुकंदर / मछली की सब्जी (1 कप) या
  • 3 रोटी + 1/2 कप लौकी सब्ज़ी + 1/2 कप सब्जी सलाद + 1 गिलास छाछ या
  • 3 रोटी + 1/2 कप भिन्डी सब्जी + 1/2 कप सब्जी सलाद + 1 गिलास छाछ या
  • 2 चपाती + भिन्डी / फिश करी (1 कप) या
  • 3 रोटी + 1/2 कप कद्दू की सब्जी + 1/2 कप सब्जी सलाद + 1 गिलास छाछ या
  • 3 रोटी + 1/2 कप मूली की सब्जी + 1/2 कप सब्जी का सलाद + 1 गिलास छाछ या
  • 2 रोटी + 1/2 कप फूलगोभी सब्ज़ी + 1/2 कप सब्जी सलाद + 1 गिलास छाछ या
  • 2 चपाती + गाजर और चुकंदर / मछली की सब्जी (1 कप) या
  • 3 चपाती + 1/2 कप लौकी / मछली (1 कप)
  • 2 चपाती + मिक्स वेज / मछली (1 कप)

हार्ट अटैक के बाद की सावधानी – Precautions after heart attack

  • धूम्रपान न करें
  • ज्यादा परिश्रम से बचे
  • कमसेकम ८ घंटे सोयें
  • कम से कम नमक का उपयोग करें
  • अपने आपको तनाव मुक्त रखें
  • नियमित दवाओं का इस्तेमाल करें
  • डॉक्टर से परामर्श लेते रहें |

निष्कर्ष – Conclusion

किसी बीमारी के लिए दवा जितनी ज़रूरी होती है उतना ही ज़रूरी होता है बीमारी के हिसाब से खाने और पीने ने का चयन करना खासकर हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारी में |हम उम्मीद करते हैं कि अगर आप diet after heart attack पर लिखी इन बातो का पालन करेंगे तो हार्ट अटैक के अलावा और बहुत सारी गंभीर बीमारियों को दूर रखने में आपको सहायता मिलेगी|

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Also read- Diet chart for heart patient recommended by Heart Foundation

पढ़ें :- 10 दिनों में वज़न कम करने का डाइट प्लान – 10 days diet plan for weight loss in Hindi

दिल का दौरा – Heart attack in Hindi

December 26, 2019 Dr. Ismail Khan

दिल का दौरा (Heart attackकिसे कहते हैं?

  • Heart attack को Myocardial infarction भी कहा जाता है ये तब होता है जब ह्रदय की मास्पेशियों में रक्त का परवाह कम हो जाता(Incomplete blockage) है या पूरी तरह से बंद हो जाता(Complete blockage) है|
  • मास्पेशियों को रक्त परवाह न होने कि वजह से हृदय की माश्पेशियों को ऑक्सीजन(Oxygen) नहीं मिलता है|
  • ऑक्सीजन ना मिलने की वजह से उनके संकुचन(Contraction) की क्षमता(Power) समाप्त हो जाती है|

मायोकार्डियल इन्फार्कशन की परिभाषा – Definition of Myocardial Infarction(MI) or Heart Attack in Hindi

मायोकार्डियल इन्फार्कशन की परिभाषा क्या है?

  • Myocardial बना है मायोकार्डियम से जो ह्रदय की मध्य परत को कहते हैं जो ह्रदय में संकुचन(contraction) करता है|
  • इन्फार्कशन(Tissue death)-माश्पेशियों में रक्त परवाह की कमी या रक्त परवाह के बंद होने की वजह से ऊतक ख़त्म(tissue death) होने लगते हैं,उसे infarction कहते हैं|

हार्ट अटैक कितने प्रकार का होता है – Heart attack types in Hindi

हार्ट अटैक कितने तरह का होता है ?

heart attack patient's ecg NSTEMI

दिल का दौरा तीन प्रकार का होता है –

  1. एस टी सेगमेंट एलिवेशन मायोकार्डियल इन्फार्कशन – ST segment elevation Myocardial Infarction or (STEMI)
  2. नॉन एस टी सेगमेंट एलिवेशन मायोकार्डियल इन्फार्कशन – Non ST segment elevation Myocardial Infarction or (NSTEMI)
  3. कोरोनरी स्पाज्म या अनस्टेबल अनजाइना – Coronary Spasm or Unstable Angina or Silent Heart attack

1.एस टी सेगमेंट एलिवेशन मायोकार्डियल इन्फार्कशन – ST segment elevation Myocardial Infarction or (STEMI)-

STEMI से क्या मतलब है ?

  • “एस टी सेगमेंट” से मतलब इलेक्ट्रोकार्डिओग्राम(ECG) के उस भाग से है जिसे एस टी सेगमेंट कहते हैं|
  • इस तरह के दिल का दौरा में, इलेक्ट्रोकार्डिओग्राम(ECG) में मौजूद एस टी सेगमेंट का हिस्सा अपनी आधार रेखा से ऊपर उठी होती है|
  • इस तरह के दिल का दौरा में कोरोनरी धमनी पूरी तरह बंद हो जाती(complete blockage) है|

2.नॉन एस टी सेगमेंट एलिवेशन मायोकार्डियल इन्फार्कशन -What is Non ST segment elevation Myocardial Infarction or (NSTEMI)

NSTEMI क्या होता है ?

  • इस तरह के दिल का दौरा में, इलेक्ट्रोकार्डिओग्राम(ECG) में मौजूद एस टी सेगमेंट का हिस्सा अपनी आधार रेखा से ऊपर उठी नहीं होती है|
  • एस टी सेगमेंट आधार रेखा से नीचे की तरफ होती है या आधार रेखा के समतल होती है|
  • मगर इस तरह के दिल के दौरा में, इलेक्ट्रोकार्डिओग्राम(ECG) में मौजूद “टी सेगमेंट” उलटी होती यानि नीचे की तरफ होती है | जिसे T inversion कहा जाता है|
  • इस तरह के दिल का दौरा में कोरोनरी धमनी पूरी तरह बंद नहीं होती है बल्कि इनमे रक्त का प्रवाह कम (incomplete blockage) हो जाता है|

ऐसे दिल का दौरा की पुष्टि के लिए कोरोनरी एनजिओग्राम और कार्डियक एंजाइम के जाँच की आवश्यकता पड़ती है|

3.कोरोनरी स्पाज्म या अनस्टेबल अनजाइना – What is Coronary Spasm or Unstable Angina or Silent Heart attack

साइलेंट हार्ट अटैक किसे कहते हैं और इसके लक्षण क्या होते हैं ?

  • इस तरह के दिल का दौरा को Silent Heart Attack भी कहते हैं|
  • अनस्टेबल अनजाइना में ECG में कोई भी बदलाव नहीं होता है , मगर इसके लक्षण STEMI की तरह ही होते हैं|
  • इसका पता जांचो के द्वारा ही क्या जा सकता है|
  • अक्सर इस तरह के दिल का दौरा को एसिडिटी या माश्पेशी का दर्द समझ कर छोड़ दिया जाता है|
  • ऐसे दिल का दौरा में कोरोनरी धमनी में ज्यादा घात तो नहीं होता है मगर दोबारा दिल का दौरा होने का खतरा बढ़ जाता है|

साइलेंट हार्ट अटैक में कोरोनरी धमनी में कोई अवरुद्ध (blockage) नहीं होता है बल्कि किसी कारणवश कुछ समय के लिए इसमें ऐठन हो जाती है|

हार्ट अटैक के लक्षण – Heart attack Signs and symptoms in Hindi

हार्ट अटैक को कैसे पहचान सकते हैं ?

1.छाती का दर्द – Chest pain

  • सीने में दर्द या बेचैनी(chest pain or discomfort) हार्ट अटैक (Heart attack) का सबसे मुख्य लक्षण होता है|
  • ये दर्द मुख्य रूप से सीने के बीच में होता है ,जो दर्द के साथ सीने में दबाव,जकड़न या फिर निचोड़(SQUEEZING PAIN)जैसा महसूस होता है|

दर्द का फैलाव – Radiation of pain

  • सीने में दर्द के साथ ये दर्द आमतौर पर बाएं हाथ (left side chest pain)में होता है|
  • लेकिन निचले जबड़े, दाहिने हाथ(right side chest pain) ,पीठ, कंधे, और ऊपरी पेट में भी फ़ैल सकता है|
  • अक्सर ये दर्द सीने के बीच में या बायीं तरफ होता है और कुछ मिनटों से अधिक समय तक रहता है|
  • यह दर्द कभी कभी सीने में जलन की तरह महसूस होता है|
  • अगर दर्द सीने के साथ कन्धों और बाये हाथ में भी पहुँचता है तो ये दर्द मुख्य रूप से एक्यूट मायोकार्डियल इन्फार्कशन या हार्ट अटैक का हो सकता है|
  • हार्ट अटैक (Heart attack) का दर्द मुख्यतः एक समान रहता है ,मुद्रा (पोजीशन) बदलने से दर्द में कोई कमी नहीं होती है |
symptoms of heart attack
Woman is clutching her chest, acute pain possible heart attack

ऐसा सीने का दर्द जो कि हार्ट अटैक (heart attack) कि वजह से होता है वो 20 मिनट या उससे ज्यादा बना रहता है|

और पढ़ें:- ह्रदय सम्बंधित छाती के दर्द की पहचान

और पढ़ें:- गैर ह्रदय सम्बंधित छाती के दर्द कि पहचान

ज़रूर पढ़ें :- हार्ट अटैक के बाद क्या खाएं क्या ना खाएं

2.मतली, उलटी या बेहोशी होना – Nausea or Vomiting and Fainting

  • छाती में दर्द के साथ मतली,उलटी और बेहोशी की भी शिकायत हो सकती|
  • बेहोशी कि शिकायत मष्तिस्क(brain)को रक्त की पूर्ति न होने कि वजह से होती है|

Heart attack के कुछ मरीजों में मतली,उलटी या बेहोशी दर्द के बिना भी हो सकता है,खासकर बूढ़े या शुगर के मरीजों में |

3.साँस फूलना – Nausea or Vomiting and Fainting

  • Chest pain के साथ साँस का फूलना Heart attack में बहुत सामान्य है |
  • साँस फूलने कि शिकायत माश्पेशियों में ऑक्सीजन की कमी या फिर फेफड़ो के अन्दर पानी जमने की वजह से होता है|
  • MI के बाद ह्रदय की मश्पेशियाँ कमजोर हो जाती हैं जिसकी वजह से इसकी संकुचन(contraction) क्षमता कम हो जाती है|
  • संकुचन क्षमता के कम होने के कारण बदन को पूर्ण ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है और फेफड़े में पानी भी जमा होता है, जिससे साँस फूलने की शिकायत शुरु होती है |
  • कभी कभी सिर्फ साँस फूलने की शिकायत ही होती है सीने में दर्द या दुसरे और कोई लक्षण नहीं होते है |
  • इसके अलावा चक्कर आना, थकान महसूस होना आदि |

Note :-कभी कभी heart attack में उपरोक्त में से कोई भी शिकायत नहीं होती है ,ऐसा खासकर बूढ़े लोगों में या शुगर के मरीजो में होता है |

Also read:- Heart attack in English

Also read :- Difference between Cardiac and Non-Cardiac Chest Pain

हार्ट अटैक का क्या कारण है – Heart attack causes in Hindi

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दिल का दौरा क्यूँ होता है ?

  • दिल का दौरा पड़ने का सबसे मुख्य कारण है कोरोनरी धमनी का बंद हो जाना(complete blockage) या उसमे बाधा का उत्पन्न होना (incomplete blockage)|
  • इसको कोरोनरी आर्टरी डिजीज़ (CADभी कहते हैं |
  • ये बाधा एक से अधिक कोरोनरी धमनी में हो सकता है|

रक्त में मौजूद ख़राब कोलेस्ट्रॉल(LDL) और कई अन्य सम्बंधित पदार्थ कोरोनरी धमनी में जमने लगते हैं जो की धीरे धीरे बड़े थक्के (plaque) का रूप ले लेते हैं,इस प्रक्रिया को अथेरोस्क्लेरोसिस और इस थक्के को अथेरोस्क्लेरोटिक प्लेक कहते हैं|

atherosclerotic plaque
atherosclerotic plaque
  • ये थक्का हाई ब्लड प्रेशर ,स्मोकिंग या किसी और कारणवश फट जाता है ,और वहां पर खून का थक्का बन जाता है जिसकी वजह से कोरोनरी धमनी पूरी तरह बंद हो जाती है |यह कुछ मिनटों में भी हो सकता है|
  • हार्ट अटैक का एक और कारण है कोरोनरी धमनी में जकडन (spasm)जो कि स्मोकिंग ,या दुसरे कई नशीले पदार्थ या फिर तनाव कि वजह से हो सकता है|
  • इसमें कोरोनरी धमनी पूरी तरह से बंद नहीं होती है|
  • उपरोक्त के अलावा और भी कारण हैं जिसकी वजह से दिल का दौरा पड़ सकता है हालंकि ये बहुत सामान्य नहीं है |
  • जैसे -बहुत तेज़ बुखार ,दिल की धड़कन का बहुत तेज़ चलना , ब्लड प्रेशर बहुत कम होना आदि|

दिल का दौरा पड़ने के जोखिम कारक – What are the Risk factors of Heart Attack in Hindi

  • जोखिम कारक उसे कहते हैं जिसकी मौजूदगी बीमारी की सम्भावना बढ़ा देती है|

Heart attack में दो तरह के जोखिम कारक होते हैं –

1.परिवर्तनीय जोख़िम कारक – Modifiable risk factors

  • ऐसे जोखिम कारक जिनको अपनी जीवन शैली मे बदलाव लाकर आप हार्ट अटैक (heart attack)से बच सकते है, जैसे –

A.धुम्रपान – Smoking

  • धुम्रपान को त्याग कर दिल का दौरा से बचाव समभव है |

B.शुगर – Diabetes

  • शुगर को नियनत्रण मे रखकर हार्ट अटैक (heart attack) से बचाव समभव है|

C.शारीरिक निषक्रियता – Physical inactivity

  • निरंतर कसरत से दिल का दौरा के अलावा और तमाम बिमरियो से बचना समभव है |रोजाना कम से कम 30 मिनट कसरत करना लाभदायक है|

D. वज़न ज्यादा होना – Over-weighted

  • वज़न का ज्यादा रहना तमाम बिमारियों को पैदा करता है इसको नियंत्रित करके तमाम बिमारियों से बच सकते हैं |

पढ़ें :- 10 दिनों में वज़न कम करने का डाइट प्लान – 10 days diet plan for weight loss in Hindi

खून मे Cholesterol की ज्यादा मात्रा का होना हार्ट अटैक (heart attack) का सबसे आम कारण है, इसको नियंत्रण में रखकर दिल का दौरा जैसी गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है|

2.अपरिवर्तनीय जोख़िम कारक – Non-Modifiable risk factors

  • ऐसे कारक जिनको बदला नहीं जा सकता है ,जैसे –

A. उम्र – Age

  • उम्र को कम या ज्यादा नहीं किया जा सकता है , आपकी उम्र जितनी ज्यादा होगी कोरोनरी आर्टरी डिजीज़ (CAD) होने कि सम्भावना उतनी ज्यादा हो सकती है|
  • जैसे –एनजायना (Angina), हार्ट अटैक (Heart attack)आदि

B.पारिवारिक इतिहास – Family History

  • अगर आपका पारिवारिक इतिहास है कि आपके पिता ,माँ ,भाई,बहन को पहले कोरोनरी धमनी कि बीमारी-
  • जैसे हार्ट अटैक हो चूका है तो आपको भी ऐसे बीमारी हो, इसकी सम्भावना बढ़ जाती है

मगर आप ये जान सकते है कि क्या उनमे कोई जोखिम कारक थे जो उन्हें नुकसान पहुंचा रहे थे,जैसे-

  • क्या वो लोग धुम्रपान करते थे ?
  • उनका वज़न ज्यादा था ?
  • क्या उनके खाने में संतृप्त वसा का प्रयोग ज्यादा होता था? (संतृप्त वसा के कुछ उदाहरण)
  • क्या उनमें शारीरिक निष्कर्यिता थी ?
  • वह शुगर से पीड़ित थे ?

अगर आपको जवाब हां में मिलता है तो आप अपनी जीवन शैली में बदलाव लाकर ह्रदय सम्बंधित बीमारी होने कि सम्भावना को कम कर सकते हैं |

C.लिंग – Sex

  • औरत के मुकाबले मर्द में हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा होता है|

हार्ट अटैक में परीक्षण-Diagnosis of Heart attack in Hindi

हार्ट अटैक को कैसे पहचान सकते हैं ?

आपका डॉक्टर सबसे पहले आपसे कुछ सवाल पूछ सकता है और आपका शारीरिक परिक्षण करते हुए ऐसे जोखिम कारको की जाँच करेगा जिससे हार्ट अटैक हो सकता है|

  1. बीमारी के बारे में पूछताछ – History taking
  2. शारीरिक परीक्षण – Physical examination
  3. चिकित्सा परीक्षण – Medical Tests

1.बीमारी के बारे में पूछताछ – History Taking

  • किसी व्यक्ति के जोखिम कारको को(risk factors) को जानना, दिल का दौरा के गंभीर कारणों को समझने या उन पर कण्ट्रोल रखने में बेहद उपयोगी हो सकता है|

जैसे – हार्ट अटैक जवान लोगो में जिनकी उम्र ३० साल से कम है उनमे बहुत सामान्य नहीं है|

जबकि ऐसे लोगो में जिनमे पहले से कोई ख़राब आदत या बीमारी मौजूद है|जैसे -ब्लड प्रेशर ,धुम्रपान, शुगर या फिर परिवार में पहले किसी को हार्ट अटैक हो चुका है ,तो ऐसे लोगो में दिल का दौरा बहुत सामान्यतः पाया जाता है|

  • इसके अलावा अगर मरीज के सीने के दर्द का फैलाव (radiate) गर्दन ,पीठ,बाये हाथ या फिर जबड़े में होता है तो ये दर्द सामान्य रूप से हार्ट अटैक की वजह से हो सकता है|
  • दर्द के साथ ये शिकायत भी होती है की बहुत ज्यादा पसीना(sweating) हो रहा है या
  • सीने के दर्द के साथ सीने में दबाव (pressure)महसूस होता है या
  • दर्द का स्वाभाव निचोड़ने(squeezing) जैसा है तो ऐसे दर्द खासतौर से दिल का दौरा सम्बंधित हो सकते हैं|

2.शारीरिक परीक्षण – Physical Examination

  • बीमारी और लक्षण का ब्यौरा लेने के बाद डॉक्टर आपका शारीरिक परिक्षण करेगा|

डॉक्टर आपका ब्लड प्रेशर ,धड़कन,साँस आदि कि जाँच करेगा जिसमें उसे निम्लिखित में से एक या एक से ज्यादा संकेत मिल सकते हैं , जैसे –

  • धड़कन का असामान्य होना – Abnormal heart rhythm
  • दो से ज्यादा धड़कन का सुनाई देना – Presence of 3rd or 4th heart sound
  • बहुत ज्यादा पसीना होना – Diaphoresis
  • ब्लड प्रेशर का कम या ज्यादा होना – Hypotension or Hypertension
  • ह्रदय की धडकन का तेज़ या धीमा होना – Tachycardia or bradycardia
  • हृदय में असामान्य ध्वनि का पाया जाना – Heart murmurs
  • मरीज़ का अपने हाथों की हथेली या मुट्ठी से सीने को दबाना या मसलना, इसे Levine’s Sign कहते हैं|(Pressing or squeezing chest with palm or fist)
  • मरीज़ का बेचैन दिखना – Restlessness
  • चेतना का कम हो जाना – Drowsiness
cause of high blood pressure
blood pressure

ये सारे परिणाम (findings) या संकेत (sign)शारीरक परीक्षण में मिल सकते हैं जो दिल का दौरा की तरफ इशारा करते हैं|

अगर परीक्षक के हाथो के सीने में लगने या दबाने (Palpation) से दर्द बढ़ता है या दोबारा शुरू हो जाता है तो ऐसा दर्द दिल का दौरा कि वजह से है इसकी सम्भावना कम हो जाती है |

3.दिल का दौरा में चिकित्सीय जाँच – Medical tests in Heart attack in Hindi

  • दिल का दौरा में किये जाने वाले जाँच –

१. इलेक्ट्रोकार्डिओग्राम – Electrocardiogram (ECG)

  • दिल के दौरे का निदान के लिए किया गया ये सबसे पहला परीक्षण होता है|
  • इसमें आपके ह्रदय की विद्दुत गतिविधि को एक पेपर पर रिकॉर्ड किया जाता है |
  • घायल ह्रदय कि मश्पेशियाँ सामान्य रूप से विद्युत् आवेगों (Electrical impulses) का सञ्चालन(conduct) नहीं करती हैं |
  • ECG दिखा सकता है कि दिल का दौरा पड़ा है या परगति में है |

2.खून कि जाँच – Blood test in heart attack in Hindi

A. कार्डिएक एंजाइम – Cardiac enzymes
ट्रोपोनिनआई और टी – Troponin I and T
  • ह्रदय में कुछ घात होता है तो ये खास एंजाइम हृदय की मांशपेशियो से निकल कर खून में शामिल हो जाते हैं|
  • इन एंजाइम का खून में एक मात्रा से ज्यादा पाया जाना हार्ट अटैक या angina का संकेत होता है|

NOTE-इन एंजाइम का खून में एक मात्रा से ज्यादा पाया जाना , हार्ट अटैक और एनजाइना के अलावा दूसरी गैर ह्रदय सम्बन्धी बिमारियों मे भी मिलता है|जैसे – बहुत ज्यादा संकर्मण (Severe infection) या गुर्दे की बीमारी(kidney disease) आदि में|

सी के-एम बी – CK-MB (creatine kinase myocardial band)-
  • इस एंजाइम का भी खून में एक मात्रा से ज्यादा पाया जाना हार्ट अटैक या एंजाइना का संकेत होता है|

NOTE – CKMB ह्रदय सम्बंधित बीमारी के अलावा अस्थमा और मांसपेशियों के अतिघात (severe musculoskeletal damage) में ज्यादा मात्रा में पाया जाता है|

इसके अलावा कंप्लीट ब्लड काउंट, लिवर फंक्शन टेस्ट, पनक्रिएटिक एंजाइम भी हार्ट अटैक  के निदान में अहम् साबित होते हैं |

3. सीने का एक्स-रे – Chest X-ray

  • आपका डॉक्टर ह्रदय का आकर, रक्त कोशिकाएं और फेफड़ो में जमा पानी को देखने के लिए एक्स-रे करवाने के लिए कह सकता है |

4. इकोकार्डियोग्राफी – Echo-Cardiography

  • ये जाँच ऐसे मरीजों में काफी अहम् साबित होता जिनको पहले से कोई ह्रदय सम्बंधित बीमारी रहती है|
  • ये जाँच आपके ह्रदय का विडियो चित्र दिखाता है ,इस जाँच के द्वारा ये पता चलता है कि ह्रदय का कौन सा हिस्सा घायल हुआ है |
  • इससे ये भी पता चलता है कि हार्ट का फंक्शन सही है या नहीं |

इनके अलावा कुछ खास किस्म के जाँच और होते हैं जो किये जा सकते हैं, ये जाँचे बीमारी कि तीव्रता पर निर्भर करती हैं ,जैसे-

1.ऐन्जिओग्राम – Coronary Catheterization (Angiogram/Angiography )

  • यह एक ऐसा परीक्षण है जिसमें आपके दिल की रक्त वाहिकाओं को देखने के लिए एक्स – रे का उपयोग किया जाता है |
  • परीक्षण आमतौर पर ये देखने के लिया किया जाता है, कि ह्रदय के रक्त प्रवाह में कोई रुकावट या कमी तो नही , और है तो कितना है (प्रतिशत में)|

2.एक्सरसाइज स्ट्रेस टेस्ट – Exercise stress test

  • इस जाँच के ज़रिये देखा जाता है कि शारीरिक गतिविधि के दौरान आपका दिल कैसे काम करता है|
  • क्यूंकि व्यायाम आपके ह्रदय पंप को कठिन और तेज़ बनाता है,ये जाँच आपके ह्रदय के भीतर रक्त के प्रवाह की समस्या को प्रकट कर सकता है |
  • इस परीक्षण में आमतौर पर ट्रैडमिल पर चलते हुए आपके ह्रदय की लय ,रक्तचाप ,और साँस कि निगरानी की जाती है |

3.कार्डियक सीटी स्कैन और ऍम आर आई – Cardiac CT scan and MRI

  • कार्डियक सीटी स्कैन और ऍम आर आई के ज़रिये भी ह्रदय की रक्त वाहिकाओं में रुकावट और ह्रदय में घात को देखा जाता है |

हार्ट अटैक का इलाज क्या है – Heart attack treatment in Hindi

हार्ट अटैक का इलाज और बचाव का तरीका :-

तत्काल इलाज – Emergency treatment

अगर आपके डॉक्टर को ये लगता है कि आपको दिल का दौरा पड़ा है तो वो तत्काल में निम्न दवाओं से आपका इलाज करेगा |

  • रक्त के जमाव को रोकने की दवा जैसे –Asprin
  • छाती का दर्द कम करने और ह्रदय में रक्त प्रवाह बढ़ाने की दवा जैसे – Nitroglycerine
  • ऑक्सीजन से
  • दिल का दौरा कि पुष्टि के बाद आपका डॉक्टर हार्ट अटैक के प्रकार के हिसाब से आपका इलाज करेगा|

आपका इलाज आपके लक्षण के समय पर भी निर्भर करता है कि आपको दिल का दौरा का लक्षण कितने घंटो या दिनों से है जैसे –

  • अगर आपको दिल का दौरा के लक्षण १२ घंटे या उससे कम समय से है तो आपका इलाज खून का थक्का तोड़ने वाली दवा से किया जा सकता है |
  • ऐसी दवाओ को थ्रोम्बोलिटिक ड्रग्स (Thrombolytic drugs) कहते है और इस परक्रिया को थ्रोम्बोलाइजेशन (Thrombolysation) कहा जाता है |
  • यदि आपको लक्षण १२ घंटो से ज्यादा समय से है तो आपका इलाज ऐन्जिओग्राम (Angiogram) के बाद तय होता है |
  • ऐन्जिओग्राम के रिपोर्ट के अनुसार आपका इलाज दवाओं से ,इंजेक्शन से, स्टंट डालकर या फिर बाईपास सर्जरी (Bypass surgery) से किया जा सकता है|

दवाओं से इलाज – Heart attack treatment with medicine in Hindi

हार्ट अटैक में उपयोग होने वाली दवाएं :-

  • खून के थक्के को तोड़ने की दवाएं(Clot busters) |
  • रक्त चाप को नियंत्रित करने और ह्रदय के रक्त प्रवाह को बढ़ाने की दवाएं |
  • रक्त को पतला रखनी वाली दवाएं जिससे कि रक्त संकरी रक्त वाहिकाओं में आसानी से प्रवाह कर सके (Blood thinners/anti platelet drugs)|
  • ऐसी दवाएं जो रक्त में मौजूद ख़राब cholesterol कि मात्रा को नियंत्रित रखे (Statins)|

Note -किसी भी दवा के इस्तेमाल से पहले डॉक्टर कि सलाह ज़रूर लें |

ज़रूर पढ़ें – हार्ट अटैक के बाद क्या खाएं क्या ना खाएं -बेस्ट डाइट चार्ट

ज़रूर पढ़ें – हार्ट अटैक सम्बंधित सीने के दर्द और सामन्य सीने के दर्द में फर्क़

शल्य क्रिया से इलाज – Surgical treatment of heart attack in hindi

1. बाईपास सर्जरी – Bypass Surgery(CABG/GRAFTING)-

  • इस शल्य क्रिया में बदन के दुसरे हिस्से से रक्त वाहिका को लेकर उसे अवरुद्ध धमनी(blocked artery) में जोड़(grafting) देते हैं|

2. एंजियोप्लास्टी – Percutaneous transluminal coronary angioplasty/PTCA/PCI(Stent placement) –

  • ये एक प्रमुख ह्रदय सम्बंधित शल्य क्रिया है जिसमे अवरुद्ध धमनी(blocked artery) में स्प्रिंग (स्टंट) डालकर उसमे रक्त प्रवाह को नियमित किया जाता है |

Note -जब भी आपको ये अंदेशा हो कि आपको दिल का दौरा पड़ सकता है या पड़ चुका है तो तुरंत Emergency में डॉक्टर से परामर्श करें |

हार्ट अटैक से कैसे बचें – Prevention from Heart attack in Hindi

दिल का दौरा से बचने का तरीका इस प्रकार है :-

  1. हार्ट अटैक (Heart attack) से बचाव के लिए सबसे ज़रूरी है कि आप लगातार अपने डॉक्टर से परामर्श लेते रहें |
  2. इसके अलावा जीवन शैली में बदलाव लाकर दिल का दौरा से बचाव संभव है ,जैसे –
  • खाने में वसा युक्त भोजन (FAT RICH FOOD) का इस्तेमाल कम करना|जैसे-रेड मीट,तली हुयी चीजें (fried food),पेस्ट्रीज और केक आदि|(हार्ट के मरीज़ के लिए डाइट चार्ट )
  • फाइबर युक्त भोजन(FIBER RICH FOOD )का ज्यादा इस्तेमाल करना|
  • खाने में नमक का इस्तेमाल कम करना |
  • ताज़ी और हरी सब्जियों का इस्तेमाल ज्यादा करना |(हार्ट अटैक के बाद क्या खाएं ?..)
  • रोजाना कसरत(EXERCISE) करना कम से कम ३० मिनट|
  • बीडी या सिगरेट का इस्तेमाल न करना या बंद करना |
  • खुद को तनाव मुक्त(STRESS FREE) रखना |

ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और शुगर को नियंतरण में रखना और लगातार डॉक्टर के संपर्क में रहना हार्ट अटैक से बचने के लिए बहुत ज़रूरी है |

पारिवारिक इतिहास(FAMILY HISTORY) में अगर किसी को ह्रदय सम्बंधित बीमारी थी तो पहले से ही बचाव करना|

ज़रूर पढ़ें  – हार्ट अटैक के बाद क्या खायें क्या नहीं ये जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

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जानें :- 1.इस ब्लॉग के बारे में, 2.लेखक के बारे में

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