डायबिटीज (शुगर) – Diabetes in Hindi

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डायबिटीज (मधुमेह,शुगर) क्या है? Diabetes in Hindi

  • डायबिटीज एक बीमारी है जो तब होती है जब आपका ब्लड ग्लूकोज, जिसे ब्लड शुगर भी कहा जाता है,रक्त में सामान्य से बहुतअधिक मात्रा में हो|
  • ग्लूकोज आपके स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आपकी मांसपेशियों और टीसूज को बनाने वाली कोशिकाओं के लिए ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण सोर्स है|
  • ग्लूकोज आपके मस्तिष्क के लिए एनर्जी का मुख्य सोर्स भी है लेकिन आपके रक्त में बहुत अधिक शुगर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकती है।
  • डायबिटीज एक पुरानी बीमारी है जो या तो तब होती है जब अग्न्याशय (Pancreas) पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं करता है या जब शरीर प्रभावी रूप से उत्पादित इंसुलिन का उपयोग नहीं कर पता है।
  • इंसुलिन एक हार्मोन है जो अग्न्याशय द्वारा बनाया जाता है, जो भोजन से ग्लूकोज को आपकी कोशिकाओं (Cells) में ऊर्जा के लिए उपयोग करने में मदद करता है।
  • कभी-कभी आपका शरीर पर्याप्त या कोई इंसुलिन नहीं बनाता है या इंसुलिन का अच्छी तरह से उपयोग नहीं कर पाता है। ग्लूकोज तब आपके रक्त में रहता है और आपकी कोशिकाओं तक नहीं पहुंचता है।
  • मधुमेह का कारण उसके प्रकार पर निर्भर करता है। लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपको किस प्रकार की डायबिटीज है, हर तरह के डायबिटीज में आपके रक्त में शुगर की अधिक हो सकती है।
  • अनियंत्रित हाई ब्लड शुगर आपकी नसों, आंखों, गुर्दे और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है।
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विषय सूची :-

  1. डायबिटीज (मधुमेह,शुगर) के प्रकार – Types of Diabetes in Hindi
  2. मधुमेह ( डायबिटीज, शुगर) के कारण – Diabetes causes in Hindi
  3. डायबिटीज (मधुमेह,शुगर) के लक्षण – Diabetes symptoms in Hindi
  4. मधुमेह ( डायबिटीज, शुगर) के जोखिम कारक – Risk factors of diabetes in Hindi
  5. डायबिटीज (मधुमेह,शुगर) की रोकथाम – Prevention of diabetes in Hindi
  6. शुगर (मधुमेह, डायबिटीज ) से होने वाली परेशानियाँ – Complications of diabetes in Hindi
  7. डायबिटीज (मधुमेह,शुगर) का परीक्षण – Diagnosis and tests in Diabetes mellitus in Hindi
  8. शुगर (मधुमेह, डायबिटीज) का इलाज – Diabetes treatment in Hindi
  9. शुगर (डायबिटीज,मधुमेह) के उपचार और रोकथाम के लिए हर्बल दवाएँ – Herbal medicines for diabetes in Hindi

सरकारी सर्वेक्षण में भारत में 11.8% मधुमेह पाया गया – Diabetes in India

  • सर्वेक्षण में कहा गया है कि पुरुषों में मधुमेह (12%) महिलाओं में (11.7%) है।
  • ज्ञात मधुमेह के लगभग 40% का निदान (Diagnosis) 1-4 साल पहले किया गया था, जबकि ज्ञात मधुमेह के 5.3% मामलों का निदान पिछले एक साल के भीतर किया गया है।
डायबिटीज टाइप 1 टाइप
non communicable disease

विश्व स्वास्थ्य संगठन का मधुमेह पर डेटा – WHO data on diabetes in Hindi

दुनिया भर में लगभग 422 मिलियन लोगों को मधुमेह है, खासकर कम और मध्यम आय वाले देशों में। 

डायबिटीज (मधुमेह,शुगर) के प्रकार – Types of Diabetes in Hindi

डायबिटीज के सबसे मुख्य प्रकार हैं टाइप-1 डायबिटीज, टाइप-2 डायबिटीज और जेसटेशनल डायबिटीज- 

टाइप 1 डायबिटीज: Type 1 diabetes in Hindi

  • यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है। प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) अग्न्याशय में कोशिकाओं पर हमला करती है और नष्ट कर देती है, जहां इंसुलिन बनता है। यह स्पष्ट नहीं है कि इस हमले का क्या कारण है। लगभग 10 प्रतिशत मधुमेह वाले लोग इस प्रकार के होते हैं।
  • टाइप -1 डायबिटीज एक इंसुलिन पर निर्भर डायबिटीज है, जिसका मतलब है कि टाइप 1 डायबिटीज के लोगों को पूरी ज़िन्दगी रोजाना कृत्रिम इंसुलिन लेना पड़ता है|

टाइप 2 डायबिटीज: Type 2 diabetes in Hindi

  • टाइप 2 डायबिटीज, इसे नॉन इन्सुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज भी कहा जाता है। दुनिया भर में मधुमेह से पीड़ित अधिकांश लोगों को टाइप 2 मधुमेह होता है | शरीर का अतिरिक्त वजन और शारीरिक निष्क्रियता(Physical inactivity) इसका मुख्य कारण है।
  • आप बचपन में या किसी भी उम्र में टाइप 2 मधुमेह का शिकार हो सकते हैं। हालांकि, इस प्रकार का मधुमेह ज्यादातर मध्यम आयु वर्ग और वृद्ध लोगों में होता है।
  • यह मधुमेह का सबसे आम प्रकार है।
  • यह हालत परिवारों में चलती है यानि परिवार के सदस्य जीन साझा करते हैं जिससे उन्हें टाइप 2 मधुमेह होने और अधिक वजन होने की संभावना बढ़ जाती है। यह हालत परिवारों में चलने का मतलब है कि अगर माँ और बाप को डायबिटीज है तो उसकी संतानों में इसके होने की सम्भावना बढ़ जाती है|

जेसटेशनल डायबिटीज: Gestational diabetes in Hindi

  • गर्भवती होने पर कुछ महिलाओं में गर्भ के दौरान मधुमेह विकसित होता है। ज्यादातर, इस प्रकार का मधुमेह बच्चे के जन्म के बाद दूर हो जाता है।
  • नाल(Placenta)द्वारा निर्मित इंसुलिन-अवरुद्ध हार्मोन इस प्रकार के मधुमेह का कारण बनता है।
  • कभी-कभी गर्भावस्था के दौरान पता चलने वाला मधुमेह वास्तव में टाइप 2 मधुमेह होता है।
जेसटेशनल डायबिटीज
gestational diabetes

डायबिटीज (मधुमेह,शुगर) के कारण – Diabetes causes in Hindi

टाइप 1 डायबिटीज का कारण – Cause of type 1 diabetes in Hindi

  • टाइप 1 मधुमेह तब होता है जब आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली जो सामन्य रूप से खतरनाक बैक्टीरिया और वायरस से लड़ती वो अग्न्याशय के इंसुलिन-उत्पादन बीटा कोशिकाओं को नष्ट कर करने लगती है, जिसकी वजह से आपको या तो इन्सुलिन कम मिलता है या नहीं मिलता है। इन्सुलिन की कमी की वजह से ब्लड शुगर कोशिकाओं में नहीं पहुँचता है जिसकी वजह से रक्त में शुगर की मात्रा बढ़ने लगती है |
  • टाइप 1 को आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारकों के संयोजन के कारण माना जाता है।
  • टाइप 1 डायबिटीज को विकसित करने में वजन की कोई भूमिका नहीं है।

टाइप 2 डायबिटीज का कारण – Cause of type 2 diabetes in Hindi

  • टाइप 2 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन के लिए प्रतिरोधी (resistant) हो जाता है या अग्न्याशय पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन करने में असमर्थ होता है। वास्तव में ऐसा क्यों होता है ये अज्ञात है।
  • हालांकि ऐसा माना जाता है कि टाइप 2 डायबिटीज आनुवांशिकी (genetics) और पर्यावरणीय कारक (environmental factors), जैसे अधिक वजन और शारीरिक निष्क्रियता की वजह से हो सकता है।

जेसटेशनल डायबिटीज का कारण – Cause of gestational diabetes in Hindi

  • जेसटेशनल डायबिटीज गर्भावस्था के दौरान होने वाला मधुमेह है।
  • “जेसटेशनल” शब्द का अर्थ उस समय से है जब बच्चा गर्भ में बढ़ता है।
  • हर 100 गर्भवती महिलाओं में से 3 से 5 को यह बीमारी होती है।
  • गर्भावस्था के दौरान, आपका शरीर विशेष हार्मोन बनाता है और अन्य परिवर्तनों से गुजरता है, जैसे कि वजन बढ़ना। इन परिवर्तनों के कारण, आपके शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन का अच्छी तरह से उपयोग नहीं करती हैं, इस स्थिति को इंसुलिन प्रतिरोध (insuln resistance)कहा जाता है।
  • देर से होने वाली गर्भावस्था के दौरान सभी गर्भवती महिलाओं में कुछ इंसुलिन प्रतिरोध होता है।
  • अधिकांश गर्भवती महिलाओं में इंसुलिन प्रतिरोध को दूर करने के लिए पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन होता है, लेकिन कुछ महिलाओं में नहीं होता है, ऐसी महिलाओं में जेसटेशनल डायबिटीज विकसित होता है।
  • अधिक वजन या मोटापे का होना जेसटेशनल डायबिटीज से जुड़ा हुआ है।
  • मधुमेह का पारिवारिक इतिहास होने से यह अधिक संभावना है कि महिला में जेसटेशनल डायबिटीज हो सकता है।

डायबिटीज (मधुमेह,शुगर) के लक्षण – Diabetes symptoms in Hindi

डायबिटीज (मधुमेह,शुगर) के लक्षण
symptoms of diabetes
  1. लगातार या ज़्यादा पेशाब आना 
  2. ज्यादा प्यास लगना 
  3. बहुत थकान महसूस करना 
  4. धुंधला दिखाई देना 
  5. ज़ख्म या घाव का जल्दी ठीक न होना 
  6. बार बार खुजली होना जो जल्दी ठीक न हो रही हो 
  7. बार बार संक्रमण का होना जैसे मसूड़ों या त्वचा में संक्रमण, पेशाब और योनि संक्रमण 
  8. शरीर के कई क्षेत्रों में त्वचा का काला पड़ना
  9. हाथ, पैर में दर्द होना या सुन्न होना 
  10. हमेशा भूख लगना 
  11. वज़न का कम होना या बढ़ना 
  12. अत्यधिक थकान होना 
  13. हमेशा उलटी लगना 
gestationa diabetes
warning symptoms of diabetes

डायबिटीज (मधुमेह,शुगर) के जोखिम कारक –  Risk factors of diabetes in Hindi

टाइप 1 डायबिटीज के कारक – Risk factors for type 1 diabetes in Hindi

टाइप 1 मधुमेह के लिए कुछ ज्ञात जोखिम कारक शामिल हैं:

1. पारिवारिक इतिहास – family history diabetes

  • टाइप 1 मधुमेह के कुछ मामलों में पारिवारिक इतिहास महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि आपके परिवार के किसी सदस्य यानि माँ, बाप, भाई  या बहन को टाइप 1 डायबिटीज है, तो आपको भी यह बीमारी हो सकती इसकी सम्भावना बढ़ जाती है।

2. जेनेटिक्स 

  • कुछ जीनों की उपस्थिति से टाइप 1 डायबिटीज के विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • टाइप 1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून स्थिति है क्योंकि यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को खुद के खिलाफ होने का कारण बनता है। ऑटोइम्यून स्थितियां जो टाइप 1 के लिए आपके जोखिम को बढ़ा सकती हैं, उनमें शामिल हैं: ग्रेव्स डिज़ीज़, मल्टीपल स्केलेरोसिस और परनीसियस एनीमिया।

 3. वायरल संक्रमण

  • कुछ शोधों में यह पाया गया है कि कुछ वायरस टाइप 1 डायबिटीज के विकास को ट्रिगर कर सकते हैं, जिससे प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर के खिलाफ हो सकती है। उदाहरण: – जर्मन खसरा, कॉक्ससेकी और मम्प्स।

४. रेस / जातीयता

  • रेस टाइप 1 डायबिटीज का जोखिम कारक हो सकता है। यह अन्य जातियों के लोगों की तुलना में गोरे लोगों में अधिक आम है।

 5. आयु

  • टाइप 1 डायबिटीज को बच्चों में होने वाली घटनाओं के कारण किशोर मधुमेह (Juvenile diabetes) के रूप में भी जाना जाता है।
  • टाइप 1 डायबिटीज किसी भी उम्र में, 4 से 7 साल के बच्चों में और 10 से 14 साल या उससे अधिक उम्र के बच्चों में दिखाई दे सकता है।

पढ़ें :- 1. हार्ट अटैक कारण लक्षण बचाव और इलाज , 2. सीने में दर्द की पहचान , 3. नींद न आने का उपचार , 4. दिल का दौरा के बाद क्या खाना चाहिए, 5. वज़न कम करने का १० दिन का डाइट प्लान, 6. कोरोना वायरस

टाइप 2 डायबिटीज के कारक – Type 2 diabetes risk factors in Hindi

  • टाइप 2 मधुमेह, मधुमेह का सबसे आम रूप है। टाइप 2 में शरीर कुछ इंसुलिन बना सकता है, लेकिन उतने प्रभावी तरीके से हार्मोन का उपयोग करने में सक्षम नहीं होता जितना होना चाहिए।

इस टाइप के डायबिटीज में दो प्रकार के जोखिम कारक होते हैं-

  1. गैर परिवर्तनीय जोखिम कारक – Non modifiable risk factors
  2. परिवर्तनीय जोखिम कारक –   Modifiable risk factors

गैर परिवर्तनीय जोखिम कारक – Non modifiable risk factors for type 2 diabetes in Hindi

टाइप 2 डायबिटीज के बहुत सारे कारक हैं जिनमें से कुछ कारकों से आप खुदको बचा नहीं सकते हैं जैसे –

1. पारिवारिक इतिहास

  • यदि आपके माता-पिता या भाई-बहन को टाइप 2 मधुमेह है तो टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।
  • यदि आपके माता-पिता, भाई, बहन या बच्चे को मधुमेह है तो आपको टाइप 2 डायबिटीज होने की संभावना दो से छह गुना अधिक है।

2. रेस / जातीयता

  • यद्यपि यह स्पष्ट नहीं है लेकिन कुछ नस्ल के लोगों में जैसे- अफ्रीकी-अमेरिकी, हिस्पैनिक अमेरिकी, अमेरिकी मूल-निवासियों और एशियाई अमेरिकियों में टाइप 2 मधुमेह का खतरा ज्यादा होता है।

4. पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज

  • पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज महिलाओं में होने वाली एक आम समस्या है, अनियमित मासिक धर्म , शरीर पर अत्यधिक बाल और वज़न का बढना इसकी विशेषता है जिसकी वजह से टाइप 2 डायबिटीज का भी खतरा बढ़ जाता है|

5. जेसटेशनल डायबिटीज

  • गर्भावधि मधुमेह कुछ महिलाओं में तब विकसित होती है जब वे गर्भवती होती हैं, यदि आपको गर्भावधि मधुमेह है तो आपको टाइप 2 मधुमेह होने का खतरा ज़्यादा है।

परिवर्तनीय जोखिम कारक – modifiable risk factors of type 2 diabetes in Hindi

1. शारीरिक निष्क्रियता

  • शारीरिक गतिविधि आपको अपने वजन को नियंत्रित करने में मदद करती है, ऊर्जा के रूप में ग्लूकोज का उपयोग करती है और आपकी कोशिकाओं को इंसुलिन के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है यानि आप जितने कम सक्रिय होंगे, आपको टाइप 2 मधुमेह का खतरा उतना अधिक होगा। 

2. अधिक वजन

  • यदि आप अधिक वजन वाले हैं, तो आपको टाइप 2 मधुमेह होने का खतरा अधिक है, खासकर यदि आपके पेट और कमर के हिस्से में वसा ज़्यादा है।

3. उच्च रक्तचाप

  • यदि आपको कभी उच्च रक्तचाप हुआ है तो आपको टाइप 2 मधुमेह होने का खतरा अधिक है।

4. धूम्रपान

  • धूम्रपान टाइप 2 मधुमेह के साथ ही हृदय रोग और कैंसर के एक उच्च जोखिम से जुड़ा हुआ है।

5. कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड का स्तर

  • यदि आपका एचडीएल (HDL) कम है जिसको ‘अच्छा कोलेस्ट्रॉल’ कहा जाता है या एलडीएल (LDL) ज़्यादा है जिसको  ‘खराब कोलेस्ट्रॉल’  कहा जाता है या ट्राइग्लिसराइड्स की मात्रा खून में ज़्यादा है, तो आपको टाइप 2 मधुमेह होने का अधिक खतरा है।

6. हृदय रोग या स्ट्रोक

  • जिन लोगों को हृदय या रक्त वाहिका रोग और स्ट्रोक होता है, उन्हें टाइप 2 मधुमेह का खतरा होता है।

हम अपनी जीवन शैली में बदलाव लाकर टाइप 2 डायबिटीज से बच सकते हैं या नियंतरण में रख सकते हैं खासकर अपने आहार और शारीरिक क्रिया में बदलाव लाकर|

जेस्टेशनल डायबिटीज के जोखिम कारक – Gestational diabetes risk factors in Hindi

  1. मधुमेह का पारिवारिक इतिहास
  2. जेस्टेशनल डायबिटीज का पिछला इतिहास
  3. गर्भावस्था से पहले अधिक वजन या मोटापा
  4. गर्भावस्था के दौरान अतिरिक्त वजन बढ़ना
  5. 35 वर्ष से अधिक की मातृ आयु
  6. जन्मजात विसंगति का पिछला इतिहास
  7. गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप का विकसित होना 
  8. अस्पष्टीकृत भ्रूण मृत्यु का पिछला इतिहास
  9. मैक्रोसोमिया का पिछला इतिहास ( मैक्रोसोमिया ऐसे नवजात शिशु का वर्णन करने के लिए उपयोग किया जाता है, जो औसत से काफी बड़ा हो)
  10. पॉली सिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम का होना
  11. गतिहीन जीवन शैली (एक गतिहीन जीवन शैली एक प्रकार की जीवन शैली है जिसमें कम या कोई शारीरिक गतिविधि शामिल नहीं है)
  12. पिछली गर्भधारण की संख्या (गर्भधारण की अधिक संख्या= जेस्टेशनल डायबिटीज विकसित होने की अधिक संभावना)

डायबिटीज (मधुमेह,शुगर) की रोकथाम – Diabetes prevention in Hindi

  • हालाँकि परिवार का इतिहास या आनुवांशिकी मधुमेह के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, फिर भी लोगों में टाइप 2 मधुमेह को रोकने और अपने स्वास्थ्य को प्रभावित करने का मौका होता है। हालांकि टाइप 1 डायबिटीज को रोकने का कोई ज्ञात तरीका नहीं है।
  • हम टाइप 2 मधुमेह, प्रीडायबिटीज और जेस्टेशनल डायबिटीज के लिए जोखिम कारकों को नियंत्रित करने के तरीकों पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

1.  वजन कम करना और इसे नियंत्रण में रखना 

  • शरीर की अतिरिक्त चर्बी, खासकर अगर पेट के आसपास जमा हो जाती है, तो हार्मोन इंसुलिन के लिए शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकती है। इससे टाइप 2 मधुमेह हो सकता है। वजन नियंत्रण मधुमेह की रोकथाम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

2. नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि या व्यायाम

  • व्यायाम के कई स्वास्थ्य लाभ हैं, जिसमें आपको अपना वजन कम करने और अपने रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करना शामिल है।
  • सप्ताह के अधिकांश दिनों में मध्यम शारीरिक गतिविधि वजन को नियंत्रित करने, रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करती है और इससे रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल में भी सुधार हो सकता है। ये कारक आपके टाइप 2 मधुमेह के जोखिम को कम करेंगे।

3.  स्वस्थ भोजन 

  • अपने आहार में वसा की मात्रा कम करें, विशेष रूप से संतृप्त और ट्रांस वसा। अधिक फल, सब्जियां और उच्च फाइबर वाले खाद्य पदार्थ खाएं।

4.  धूम्रपान न करें

धूम्रपान करने वालों को मधुमेह के गैर-धूम्रपान करने वालों के रूप में विकसित होने का खतरा दो गुना अधिक है।

5.  कार्बोहायड्रेट का इस्तेमाल कमसेकम करें 

  • केटोजेनिक या बहुत कम-कार्ब आहार का पालन करने से रक्त शर्करा और इंसुलिन के स्तर को नियंत्रण में रखने में मदद मिल सकती है, जो मधुमेह से बचा सकती है।

6. कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखना 

  • यदि आपका एचडीएल कम है जिसको ‘अच्छा कोलेस्ट्रॉल’ कहा जाता है या एलडीएल ज़्यादा है जिसको  ‘खराब कोलेस्ट्रॉल’  कहा जाता है या ट्राइग्लिसराइड्स की मात्रा खून में ज़्यादा है, तो आपको टाइप 2 मधुमेह होने का अधिक खतरा है। कोलेस्ट्रॉल का ध्यान रखने से आप मधुमेह के खतरे को कम कर सकते हैं ।

7. प्रोसेस्ड फूड और फ़ास्ट फूड से बचें

  • प्रोसेस्ड फूड और फ़ास्ट फ़ूड के लगातार इस्तेमाल से डायबिटीज का खतरा अधिक हो जाता है , खाने में होल ग्रेन और ताज़ी हरी सब्जियों का इस्तेमाल करने से इससे बचाव संभव है |

8. शराब का सेवन सीमित करें

  • शराब के अधिक सेवन से वजन बढ़ सकता है और इससे आपका रक्तचाप और ट्राइग्लिसराइड का स्तर बढ़ सकता है और इस प्रकार टाइप 2 मधुमेह होने का खतरा अधिक हो जाता है। इसलिए शराब के सेवन से बचकर आप मधुमेह के खतरे को कम कर सकते हैं।

9. उक्त रक्तचाप

  • नियमित व्यायाम, कम नमक वाले आहार, स्वस्थ वजन रखने और उचित समय पर दवा लेने से रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता है।
  • रक्तचाप का प्रबंधन करने से टाइप 2 मधुमेह का खतरा कम हो सकता है।

10. टाइप 2 डायबिटीज को रोकने के लिए प्राकृतिक इलाज़

  1. करक्यूमिन – यह चमकीली हल्दी का एक घटक है जो मसाले के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इसमें ऐसे गुण पाए जाते हैं, यह जोड़ो में होने वाले दर्द और सूजन के लिए बहुत फायदेमंद होता है। यह माना जाता है कि यह इंसुलिन प्रतिरोध को कम कर सकता है और मधुमेह के बढ़ने के जोखिम को कम कर सकता है।
  2. बारबेरिन-  बरबेरिन मधुमेह वाले लोगों में रक्त शर्करा के स्तर को थोड़ा कम करने के लिए जाना जाता है। इसके अलावा, कुछ शुरुआती शोध बताते हैं कि 500 ​​मिलीग्राम बेरबेरीन को 3 महीने तक रोजाना 2-3 बार लेने से ब्लड शुगर को मेटफोर्मिन के रूप में प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है।
  3. एलोवेरा – यह पारंपरिक चिकित्सा में इस्तेमाल होने वाले सबसे पुराने पौधों में से एक है। एलोवेरा के पत्तों के अंदर मौजूद जेल का उपयोग लंबे समय तक चमड़ी की बिमारियों और अन्य चिकित्सा गुणों के लिए किया गया है। विभिन्न हालिया अध्ययनों के अनुसार यह रक्त शर्करा के प्रबंधन में भी मदद कर सकता है।
  4. मेथी – मेथी एक जड़ी बूटी है जो भोजन के बाद बढ़ने वाले रक्त शर्करा को कम करके मधुमेह का इलाज करने में मदद कर सकती है। आप भोजन के बाद बढ़ने वाले रक्त शर्करा को कम करने के लिए मेथी का उपयोग कर सकते हैं| इसका इस्तेमाल आहार में, व्यंजनों में मेथी जोड़कर या चाय के रूप में कर सकते हैं।
  5. अदरक-  यह रक्त शर्करा के स्तर को कम करने और मधुमेह वाले लोगों में इंसुलिन प्रतिक्रिया को विनियमित करने में मदद कर सकता है।

डायबिटीज (मधुमेह,शुगर) से होने वाली परेशानियाँ या जटिलतायें – Complications of diabetes in Hindi 

diabetes complications
complications of diabetes in Hindi

A. डायबिटीज टाइप 1 और टाइप 2 से होने वाली जटिलताएं 

  • मधुमेह की कई जटिलताएं हैं जो धीरे-धीरे विकसित होती हैं। खराब नियंत्रित रक्त शर्करा के साथ लंबे समय तक मधुमेह से जटिलताओं का खतरा अधिक होता है।
  • मधुमेह की कुछ जटिलताओं से जीवन को खतरा है। मधुमेह की जटिलताओं को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है: –

1. लॉन्ग टर्म डायबिटीज काम्प्लीकेशंस

2. शोर्ट टर्म डायबिटीज काम्प्लीकेशंस 

1.लॉन्ग टर्म डायबिटीज काम्प्लीकेशंस

हृदय रोग:- Cardiovascular disease

  • हृदय और रक्त वाहिका रोग कई लोगों के लिए सामान्य समस्याएं हैं जिनका ब्लड शुगर अनियंत्रित रहता है। 
  • आपमें दिल की समस्याओं और स्ट्रोक का जोखिम दो गुना अधिक है उन लोगों के मुकाबले जो मधुमेह से पीड़ित नहीं है। 
  • हृदय संबंधी समस्याएं, जिनमें सीने में दर्द (एनजाइना), दिल का दौरा, धमनियों का अकड़ना के साथ कोरोनरी धमनी (एथेरोस्क्लेरोसिस) की बीमारी शामिल है।

डायबिटिक न्यूरोपैथी – Diabetic neurapathy

  • डायबिटीज से तंत्रिका क्षति को मधुमेह न्यूरोपैथी कहा जाता है। 
  • मधुमेह वाले लगभग 50 प्रतिशत लोगों में तंत्रिका क्षति होती है। 
  • छोटी रक्त वाहिकाएं आपकी नसों को विशेष रूप से आपके पैरों में रक्त प्रवाह करती हैं, इसलिए यदि रक्त वाहिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, तो अंत में नसों को भी नुकसान होगा। यह झुनझुनी, सुन्नता, जलन या दर्द का कारण बन सकता है जो आमतौर पर पैर की उंगलियों पर शुरू होता है या उंगलियां से धीरे-धीरे ऊपर की ओर फैलती हैं। 
  • मधुमेह वाले लोगों को नियमित रूप से अपने पैरों की जांच करनी चाहिए। यदि आपने अनुपचारित छोड़ दिया है, तो आप प्रभावित अंगों में महसूस करने की सभी भावना खो सकते हैं।
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नज़रों की समस्या:- Vision problems or Diabetic retinopathy 

  • मधुमेह वाले अधिकांश लोग जिनका ब्लड सुगर अनियंत्रित होता है उनमें नेत्र रोग (डायबिटिक रेटिनोपैथी) का किसी न किसी रूप होने की संभावना अधिक होती है जैसे – अंधापन या  कम दिखाई देना।
  • ऐसे लोगों में नज़रों की दूसरी बीमारियाँ , जैसे मोतियाबिंद और ग्लूकोमा का भी अधिक खतरा होता है।
  • नियमित जांच से मोतियाबिंद और आंखों की अन्य समस्याओं के खतरे को कम किया जा सकता है |

गुर्दे की बीमारी – Diabetic Nephropathy

  • मधुमेह संबंधी नेफ्रोपैथी क्रोनिक किडनी रोग का एक प्रमुख कारण है। गुर्दे में ग्लोमेरुली नामक लाखों छोटे रक्त वाहिका समूह होते हैं जो आपके रक्त से अपशिष्ट को छानते हैं। 
  • अनियंत्रित मधुमेह गुर्दे में छोटे रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है जिससे गुर्दे कम कुशल हो जाते हैं या पूरी तरह से विफल हो जाते हैं, जिसके लिए डायलिसिस या गुर्दा प्रत्यारोपण की आवश्यकता हो सकती है।
  • गुर्दे की बीमारी होने की संभावना को कम करने के लिए अपने मधुमेह और रक्तचाप को नियंत्रण में रखें।

आघात – Stroke

  • मधुमेह वाले लोगों में स्ट्रोक होने की संभावना दो से चार गुना अधिक होटी है। ऐसा इसलिए है क्योंकि शरीर में अतिरिक्त ग्लूकोज रक्त वाहिकाओं की दीवारों में अधिक फैट जमाकर थक्के को जन्म दे सकता है। थक्के आपके रक्त वाहिकाओं में संकुचन या रुकावट पैदा कर सकते हैं, जो अंततः मस्तिष्क में ऑक्सीजन के प्रवाह को रोक सकते हैं और एक स्ट्रोक का कारण बन सकते हैं। 
  • स्ट्रोक के अपने जोखिम को कम करने के लिए रक्त शर्करा, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के लिए लक्ष्य स्तर बनाए रखें।

स्तंभन दोष –  Erectile dysfunction 

  • इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ईडी) ,संभोग करने के लिए पर्याप्त रूप से स्तंभन प्राप्त करने या रखने में असमर्थता है जो मधुमेह की शिकायत से हो सकती है। 
  • यह वास्तव में न्यूरोपैथी का एक रूप है।

गैस्ट्रोपेरेसिस या पेट का पक्षाघात – Gastroparesis or stomach paralysis

  • गैस्ट्रोपैरिसिस, जिसे डिलेड गैस्ट्रिक एम्पटीइंग भी कहा जाता है, एक विकार है जो पेट से लेकर आपकी छोटी आंत तक भोजन की गति को धीमा या बंद कर देता है, भले ही पेट या आंतों में कोई रुकावट न हो।
  • लक्षणों में सीने में दर्द या जलन, मतली, उल्टी और भोजन करते समय ही पेट का भरा हुआ महसूस करना शामिल है। 
  • विभिन्न अध्ययनों के अनुसार, डायबिटीज गैस्ट्रोपैरिस का सबसे आम कारण है।

स्लीप एप्निया – Sleep Apnoea 

  • स्लीप एपनिया एक नींद विकार है जिसमें व्यक्ति को सांस लेने में रुकावट होती है। 
  • प्रत्येक रूकावट कुछ सेकंड से कुछ मिनट तक रह सकता है। 
  • सबसे आम रूप में, यह जोर से खर्राटों का अनुसरण करता है। 
  • स्लीप एपनिया टाइप 2 मधुमेह के रोगियों में एक आम समस्या है।

संक्रमण – Infections 

  • खराब अनियंत्रित मधुमेह वाले मरीजों में बैक्टीरिया और फंगल संक्रमण होने का खतरा होता है। 
  • मधुमेह वाले व्यक्तियों में म्यूकोक्यूटेनियस फंगल संक्रमण (जैसे, मौखिक और योनि कैंडिडिआसिस) के लिए संवेदनशीलता बढ़ जाती है।

प्रतिरक्षा रोग – Immune dysfunction

  • प्रतिरक्षा रोग एक अन्य प्रमुख जटिलता है और सेलुलर प्रतिरक्षा पर हाइपरग्लाइसेमिया के प्रत्यक्ष प्रभावों से विकसित होता है। 
  • मधुमेह के रोगी विशेष रूप से बैक्टीरिया और फंगल संक्रमण के लिए अतिसंवेदनशील होते हैं।

2. शोर्ट टर्म डायबिटीज काम्प्लीकेशंस 

ब्लड शुगर का बहुत कम हो जाना – Hypoglycemia

  • हाइपोग्लाइसीमिया में रक्त शर्करा बहुत कम हो जाता है। 
  • आपके रक्त शर्करा के कम होने की संभावना होती है, खासकर यदि आप इंसुलिन या ऐसी दवा ले रहे हैं जो आपके शरीर में दिन भर इंसुलिन का उत्पादन करते हैं।
  • इन दवाओं के साथ, यदि आप सामान्य से कम खाते हैं या अधिक सक्रिय रहते हैं, तो आपके रक्त शर्करा में बहुत अधिक गिरावट हो सकती है। 
  • हाइपोग्लाइसीमिया का अन्य संभावित कारण बहुत अधिक शराब का सेवन है (शराब लीवर को ग्लूकोज छोड़ने से रोकती है)।

हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षण जिन्हें पहचानना आसान है: –

  • तेज धडकन
  • पसीना आना
  • त्वचा की सफेदी
  • चिंता या घबराहट 
  • उंगलियों, पैर की उंगलियों और होंठों में सुन्नपन
  • अनिद्रा 
  • उलझन
  • सिर दर्द
  • आवाज़ का लडखडाना आदि |

पढ़ें :- 1. हार्ट अटैक कारण लक्षण बचाव और इलाज , 2. सीने में दर्द की पहचान , 3. नींद न आने का उपचार , 4. दिल का दौरा के बाद क्या खाना चाहिए, 5. वज़न कम करने का १० दिन का डाइट प्लान, 6. कोरोना वायरस

हाइपरआस्मोलर हाइपरग्लाइसेमिक नॉनकेटोटिक सिंड्रोम – Hyperosmolar Hyperglycemic Nonketotic Syndrome

  • Hyperosmolar Hyperglycemic Nonketotic Syndrome (HHNS), जिसे Hyperosmolar Hyperglycaemic State (HHS) के रूप में भी जाना जाता है, एक खतरनाक स्थिति है जो बहुत ही उच्च रक्त शर्करा के स्तर से उत्पन्न होती है। यदि अनुपचारित छोड़ दिया जाए तो यह मृत्यु का कारण बन सकता है।

 हाइपरोस्मोलर हाइपरग्लाइकेमिक स्टेट (HHS) के लक्षण : –

  • ब्लड ग्लूकोस 600 मिलीग्राम/डीएल या उससे ज्यादा होना 
  • अत्यधिक प्यास लगना 
  • मुंह सूखना 
  • पेशाब ज़्यादा होना 
  • गर्म, शुष्क त्वचा
  • बुखार
  • सुस्ती और कनफूजन 
  • दु: स्वप्न
  • आँखों के सामने अँधेरा होना 
  • अकड़ी आना 
  • बेहोश होना आदि |

डायबिटिक केटोएसिडोसिस – Diabetic ketoacidosis (DKA)

  • मधुमेह केटोएसिडोसिस मधुमेह की एक गंभीर जटिलता है|
  • ये तब होती है जब आपका शरीर इंसुलिन की कमी के कारण केटोन्स नामक एसिड का उच्च मात्रा में उत्पादन करता है।

डायबिटिक केटोएसिडोसिस (DKA) के संकेत और लक्षण: –

  • अत्यधिक प्यास लगना 
  • लगातार पेशाब आना
  • मतली और उल्टी होना 
  • पेट में दर्द होना 
  • कमजोरी या थकान लगना 
  • साँस फूलना 
  • फलित-सुगंधित श्वास
  • उलझन, घबराहट होना 
  • उच्च रक्त शर्करा का स्तर (हाइपरग्लेसेमिया)
  • पेशाब में कीटोन का अधिक मात्रा में पाया जाना आदि | 

जेस्टेशनल डायबिटीज से होने वाली परेशानियाँ या जटिलतायें – Complications of gestational diabetes in Hindi

  • हालांकि गर्भावधि मधुमेह से पीड़ित ज्यादातर महिलाएं स्वस्थ बच्चे को जन्म देती हैं, लेकिन खराब रक्त शर्करा का स्तर मां के साथ-साथ बच्चे को भी परेशान कर सकता है।

जटिलताओं जो बच्चे को प्रभावित कर सकती हैं – Complications that may effect the baby

  • मैक्रोसोमिया – अत्यधिक जन्मजात वजन और बहुत बड़े बच्चे को प्रसव के लिए सिजेरियन सेक्शन की आवश्यकता हो सकती है। 
  • हाइपोग्लाइसीमिया – जन्म के बाद बच्चे में निम्न रक्त शर्करा के स्तर का जोखिम
  • समय से पहले जन्म का खतरा
  • श्वसन संकट सिंड्रोम का खतरा
  • बाद के जीवन में टाइप 2 मधुमेह का खतरा 
  • गर्भावस्था के अंत में बच्चे को जान का खतरा आदि |

जटिलताओं जो मां को प्रभावित कर सकती हैं – Complications that may effect the mother

  • प्रीक्लेम्पसिया-  प्रेक्लेम्पसिया गर्भावस्था के दौरान होने वाली एक ऐसी स्थिति है जहां उक्त रक्तचाप और सूजन की समस्या होती है जो मुख्यता चेहरे, हाथों और पैरों में होती है।
  • भविष्य में मधुमेह का खतरा  – जिन लोगों को गर्भकालीन मधुमेह है, उन्हें भविष्य में गर्भावस्था के दौरान फिर से होने संभावना होती है मधुमेह टाइप 2 के होने की भी संभावना होती है।

प्रीडायबिटीज की जटिलतायें – Complications of prediabetes

  • टाइप 2 मधुमेह होने का खतरा

शुगर (मधुमेह, डायबिटीज) का परीक्षण – Diagnosis and tests in Diabetes mellitus

डायबिटीज का पता कैसे किया जाता है?

मधुमेह के निदान के लिए निम्नलिखित परीक्षणों का उपयोग किया जाता है  :

1.खाली पेट ब्लड शुगर की जाँच – Fasting blood sugar test (FPG)

  • खाने के बिना कम से कम 8 घंटे चले जाने के बाद फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज परीक्षण आपके रक्त शर्करा को मापता है।
  • इस टेस्ट का इस्तेमाल डायबिटीज या प्रीडायबिटीज का पता लगाने के लिए किया जाता है।
  • 100 मिलीग्राम / डीएल से कम फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज का स्तर सामान्य है।
  • 100 से 125 मिलीग्राम / डीएल तक फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज के स्तर को प्रीडायबिटीज माना जाता है।
  • यदि यह 126 मिलीग्राम / डीएल या उससे ज्यादा है, लगातार दो दिन परीक्षण करने पर , तो आपको मधुमेह है।

2. ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट – Oral glucose tolerance test (OGTT)

  • आपको परीक्षण से पहले कम से कम आठ घंटे उपवास करने की आवश्यकता है।
  • आपके प्लाज्मा ग्लूकोज को पानी में घुलने वाले 75 ग्राम ग्लूकोज पीने से तुरंत पहले और दो घंटे के बाद मापा जाता है।
  • यदि तरल पीने के 2 घंटे बाद आपका रक्त शर्करा का स्तर 140 और 199 मिलीग्राम / डीएल के बीच है, तो आपको प्रीडायबिटीज का एक प्रकार है जिसे ग्लूकोज इम्पेयर्ड इन्टोलेरन्स या आईजीटी कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि आपको टाइप 2 मधुमेह विकसित होने की अधिक संभावना है लेकिन अभी तक नहीं है ।
  • 200 मिलीग्राम / डीएल या इससे अधिक के दो घंटे के ग्लूकोज स्तर की पुष्टि दूसरे दिन परीक्षण दोहराकर करने का मतलब है कि आपको मधुमेह है।

3. रैंडम ब्लड शुगर टेस्ट – Random blood sugar test (RPG)

  • एक रैंडम समय पर रक्त का नमूना लिया जाएगा यानि अपने कब खाया है इससे कोई मतलब नहीं होता है , 200 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर या उच्चतर का एक रैंडम ब्लड शुगर का स्तर मधुमेह का सुझाव देता है।

4. हीमोग्लोबिन A1c –  Hemoglobin A1c (HbA1c)

  • हीमोग्लोबिन ए 1 सी परीक्षण आपको पिछले 2 से 3 महीनों में रक्त शर्करा के औसत स्तर को बताता है। इसे HbA1c, ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन टेस्ट और ग्लाइकोहीमोग्लोबिन भी कहा जाता है।
  • इस रक्त परीक्षण में उपवास की आवश्यकता नहीं है। यह लाल रक्त कोशिकाओं में ऑक्सीजन-ले जाने वाले प्रोटीन हीमोग्लोबिन से जुड़े रक्त शर्करा के प्रतिशत को मापता है।
  • आपके रक्त शर्करा का स्तर जितना अधिक होगा, उतना हीमोग्लोबिन आपके पास चीनी के साथ जुड़ा होगा।
  • दो अलग-अलग परीक्षणों पर ए 1 सी का स्तर 6.5 प्रतिशत या उससे अधिक होना दर्शाता है कि आपको मधुमेह है।
  • 5.7 और 6.4 प्रतिशत के बीच एक ए 1 सी, प्रीबायबिटीज का संकेत देता है।
  • 5.7 से नीचे सामान्य माना जाता है।

Criteria for the Diagnosis of Prediabetes and Diabetes :-

Name of testNormalPrediabetesDiabetes
Fasting plasma glucose (FPG) in mg/dlLess than 100 mg/dlBetween 100-125 mg/dl126 mg/dl or higher
Oral glucose tolerance test (OGTT) in mg/dlLess than 139 mg/dlBetween 140 to 199 mg/dl200 mg/dl or higher*
Random plasma glucose (RPG) in mg/dlLess than 140 mg/dlBetween 140-199 mg/dl200 mg/dl or higher**
Hemoglobin A1c (HbA1c) in percentLess than 5.7%Between 5.7 to 6.4%6.5% or higher

* परीक्षा को दोहराकर परिणाम की पुष्टि की जानी चाहिए।

** हाइपरग्लाइसेमिया या हाइपरग्लाइसेमिक संकट के क्लासिक लक्षणों वाले रोगी में निदान के लिए।

शुगर (मधुमेह, डायबिटीज) का इलाज – Diabetes treatment in Hindi 

टाइप 1 डायबिटीज का उपचार – Treatment of type 1 diabetes in Hindi

  • अग्न्याशय द्वारा इंसुलिन उत्पादन के अभाव के कारण टाइप 1 मधुमेह को नियंत्रित करना विशेष रूप से कठिन है।
  • इंसुलिन टाइप 1 मधुमेह का मुख्य उपचार है। यह उस हार्मोन की जगह लेता है, आपका शरीर जिसका उत्पादन करने में सक्षम नहीं है।
  • यदि आपको  टाइप 1 मधुमेह है , तो आपको इंसुलिन लेना होगा क्योंकि आपका शरीर अब इसे नहीं बनाता है । आपको भोजन के साथ दिन में कई बार इंसुलिन लेने की आवश्यकता हो सकती है। 
Treatment of diabetes
diabetes treatment

इंसुलिन के प्रकार और वे कैसे काम करते हैं:-

  1. रैपिड-एक्टिंग इंसुलिन: – यह 15 मिनट के भीतर काम करना शुरू कर देता है, 1 घंटे के भीतर पीक प्रभाव और इसका प्रभाव 3 से 4 घंटे तक रहता है। 
  2. शोर्ट-एक्टिंग इंसुलिन: – इसे रेगुलर इंसुलिन भी कहा जाता है जो 30 मिनट के भीतर काम करना शुरू कर देता है, 3-4 घंटों में चरम प्रभाव और 6 से 8 घंटे तक रहता है।
  3. इंटरमीडिएट-एक्टिंग इंसुलिन : – 1 से 2 घंटे के भीतर काम करना शुरू कर देता है, 4 से 12 घंटे के भीतर पीक प्रभाव और 12 से 18 घंटे तक रहता है।
  4. लॉन्ग-एक्टिंग इंसुलिन: – यह इंजेक्शन के कुछ घंटे बाद काम करना शुरू कर देता है और 24 घंटे या इससे अधिक समय तक रहता है।
insulin, regular insulin
insulin

नोट: –  अपने इंसुलिन को कब और कैसे लें, इस बारे में हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह को ध्यान में रखें। 

टाइप 2 डायबिटीज का उपचार – Treatment of type 2 diabetes in Hindi

टाइप 2 मधुमेह की दवा की सूची – List of type 2 diabetes medicine

कभी-कभी टाइप 2 डायबिटीज को स्वस्थ भोजन विकल्प बनाने और शारीरिक रूप से अधिक सक्रिय होने से प्रबंधित किया जा सकता है। यदि जीवनशैली में बदलाव ब्लड शुगर को कम करने के लिए पर्याप्त नहीं है, तो प्रभावी लोगों को दवा लेने की आवश्यकता है।

  • ये दवाएं आपके रक्त शर्करा को कई तरीकों से कम करती हैं : –

1. अल्फा-ग्लूकोसिडेस इनहिबिटर्स – Alfa-glucosidase inhibitors (AGIs)

  • एजीआई को स्टार्च ब्लॉकर्स भी कहा जाता है,ये भोजन के बाद रक्त शर्करा के स्तर को कम करते हैं|
  • इंसुलिन के स्राव या संवेदनशीलता पर उनका सीधा प्रभाव नहीं पड़ता है।
  • ये स्टार्चयुक्त खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले कार्बोहाइड्रेट के पाचन को धीमा करके काम करते हैं। 

Some examples of AGIs:-

  • Acarbose
  • Miglitol

2. बिगुआनाइड्स – Biguanides 

  • ये दवाएं पाचन से ग्लूकोज के उत्पादन को कम करके काम करती हैं।
  • जो ग्लूकोज लीवर बनाता है ये दवाएं उसकी मात्रा कम करती हैं।
  • मेटफॉर्मिन डायबिटीज के इलाज के लिए वर्तमान में उपलब्ध इस ग्रुप की अकेली दवा है जो कई देशों में इस्तेमाल की जाती है।

3. डाइपेपटाईडील पेपटाईडेज 4 DPP – ) इन्हिबिटर्स – Dipeptidyl peptidase 4 (DPP4inhibitors

  • इसके अलावा इसे gliptins के रूप में जाना जाता है
  • ब्लड ग्लूकोस की मात्रा अधिक कम किये बिना ये उसे नियंत्रित रखता है।
  • ये दवायें इंसुलिन स्राव को उत्तेजित करती हैं |

Some examples of gliptins: –

  • Linagliptin
  • Saxagliptin
  • Sitagliptin etc.

4. ग्लूकागन लाइक पेप्टाइड – Glucagon-like peptide (GLP-1)

  • GLP-1 एक इन्क्रिटिन है, यह आंतों का एक हार्मोन है जो पोषक तत्वों के अंतर्ग्रहण के बाद स्रावित होता है जो अग्नाशय β कोशिकाओं द्वारा ग्लूकोज-उत्तेजित इंसुलिन स्राव को बढ़ाता है, जो आंत की एल कोशिकाओं द्वारा छोटी आंत और प्रोक्सिमल कोलन में स्रावित होता है।

Some examples of glucagon like peptide:-

  • Dulaglutide
  • Exenatide
  • liraglutide

5.मेग्लिटीनाइड्स – Meglitinides (glinides)

  • ये दवाएं अधिक इंसुलिन जारी करने के लिए अग्न्याशय को उत्तेजित करती हैं।

Some examples of Meglitinides : –

  • Nateglinide
  • Repaglinide

6. सोओडियम-ग्लूकोज कोट्रांसपोरेटर -2 इनहिबिटरस – Sodium-glucose cotransporter-2 inhibitors(SGLT2 inhibitors)

  • SGLT2 इन्हिबिटर्स, जिसे ग्लिफ़्लोज़िन भी कहा जाता है
  • ये दवाएं गुर्दे में ग्लूकोज के पुनर्वितरण को रोकती हैं और इसलिए रक्त शर्करा को कम करती हैं।
  • मूत्र में अधिक ग्लूकोज छोडती हैं।

Some examples of gliflozins  : –

  • Canagliflozin 
  • Dapagliflozin

7. सल्फोनीलयुरियाज  – Sulfonylureas

  • ये अग्न्याशय में बीटा कोशिकाओं से इंसुलिन रिलीज को बढ़ाकर कार्य करते हैं।

Some examples of Sulfonylureas:-

  • Glyburide
  • Glipizide
  • Glimepiride

8. Thiazolidinediones: –

  • इसे ग्लिटाज़ोन भी कहा जाता है 
  • ये शरीर की इंसुलिन के प्रतिरोध को कम करके काम करते हैं|
  • इंसुलिन को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करते हैं।

Some examples of glitazones:-

  • Pioglitazone
  • Rosiglitazone

लोगों को इनमें से एक से अधिक ड्रग्स लेने की आवश्यकता हो सकती है। और टाइप 2 मधुमेह वाले कुछ लोगों को इंसुलिन भी लेने की आवश्यकता पड़ सकती है।

शुगर (डायबिटीज,मधुमेह) के उपचार और रोकथाम के लिए हर्बल दवाएँ – Herbal medicines for diabetes treatment and prevention:-

1. एलो वेरा – Aloe Vera:-

  • एलोवेरा एक सामान्य पौधा है जिसके कई अलग-अलग उपयोग हैं।
  • बहुत से लोग त्वचा की देखभाल के लिए इसके लाभों से अवगत हैं |
  • इसका उपयोग स्किन की कई तरह की बिमारियों के उपचार के लिए किया जाता है|
  • एलो सैप कब्ज़ के उपचार में काफी प्रभावी माना जाता है | 
  • इसके अलावा कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि एलोवेरा के पौधे के रस से  टाइप 2 मधुमेह वाले लोगों में रक्त शर्करा को कम करने में मदद मिल सकती है । 
  • आप इसके जूस पल्प को ड्रिंक या स्मूदी में या कैप्सूल के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं, जिसमें एलो सप्लीमेंट्स होते हैं।

2. दालचीनी – Cinnamon:-

  • प्रतिदिन लगभग आधा चम्मच दालचीनी का सेवन करने से टाइप 2 मधुमेह वाले लोगों में रक्त शर्करा, कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर में महत्वपूर्ण सुधार हो सकता है।
  • शोध में बताया गया है कि इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाकर दालचीनी रक्त शर्करा के स्तर को कम करती है।

पढ़ें :- 1. हार्ट अटैक कारण लक्षण बचाव और इलाज , 2. सीने में दर्द की पहचान , 3. नींद न आने का उपचार , 4. दिल का दौरा के बाद क्या खाना चाहिए, 5. वज़न कम करने का १० दिन का डाइट प्लान, 6. कोरोना वायरस

3. करेला – Bitter melon:-

  • बिटर मेलोन, जिसे भारत में करेला रूप में भी जाना जाता है , एक अद्वितीय सब्जी-फल है जिसका उपयोग भोजन या दवा के रूप में किया जा सकता है।
  • खाद्य घटक होने के अलावा, करेला भी लंबे समय से मधुमेह के उपचार के लिए एक हर्बल उपचार के रूप में इस्तेमाल किया गया है, जिसमें  टाइप 2 डायबिटीजभी शामिल है
  • माना जाता है कि पारंपरिक चीनी चिकित्सा में करेला को प्यास और थकान को दूर करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो टाइप 2 मधुमेह के दो संभावित लक्षण हैं।
  • करेला में एंटी-डायबिटिक गुणों के साथ कम से कम तीन सक्रिय पदार्थ होते हैं, जिनमें चरन्ती भी शामिल है , इसमें रक्त के ग्लूकोज को कम करने वाले प्रभाव मौजूद होते हैं, दूसरा वैसिन और तीसरा एक इंसुलिन जैसा कंपाउंड होता है जिस को पॉलीपेप्टाइड-पी के रूप में जाना जाता है।

4. मेथी – Fenugreek

  • मेथी एक सुगंधित पौधा है जिसका उपयोग एक औषधि के रूप में और मध्य पूर्व में हजारों वर्षों से मसाले के रूप में किया जाता रहा है।
  • खाना पकाने का एक लोकप्रिय घटक होने के साथ-साथ मेथी में कई स्वास्थ्य लाभ हैं, क्योंकि यह टाइप 2 मधुमेह की शुरुआत में देरी या रोकथाम में मदद कर सकता है।
  • मेथी के बीज घुलनशील फाइबर में उच्च होते हैं, जो पाचन को धीमा करके और कार्बोहाइड्रेट को अवशोषित करके रक्त शर्करा को कम करने में मदद करता है। इससे पता चलता है कि ये मधुमेह के इलाज में प्रभावी हो सकते हैं।

5. करक्यूमिन – Curcumin: –

  • यह चमकीली हल्दी का एक घटक है जो मसाले के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। 
  • इसमें ऐसे गुण पाए जाते हैं, यह जोड़ो में होने वाले दर्द और सूजन के लिए बहुत फायदेमंद होता है। 
  • यह माना जाता है कि यह इंसुलिन प्रतिरोध को कम कर सकता है और मधुमेह के बढ़ने के जोखिम को कम कर सकता है।

 6. बारबेरिन – Barberine:-

  • बरबेरिन मधुमेह वाले लोगों में रक्त शर्करा के स्तर को थोड़ा कम करने के लिए जाना जाता है। 
  • इसके अलावा, कुछ शुरुआती शोध बताते हैं कि 500 ​​मिलीग्राम बेरबेरीन को 3 महीने तक रोजाना 2-3 बार लेने से ब्लड शुगर को मेटफोर्मिन के रूप में प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है।

ज्ञात हो कि यह जड़ी बूटी पारंपरिक फार्मास्यूटिकल्स के मेटाबोलिज्म में हस्तक्षेप कर सकती है और गर्भवती होने पर इसे कभी नहीं लेना चाहिए। 

 7. पवित्र तुलसी – Holy basil:-

  • जानवरों में अध्ययन से पता चलता है कि पवित्र तुलसी इंसुलिन के स्राव को बढ़ा सकती है।
  • टाइप 2 मधुमेह वाले लोगों में पवित्र तुलसी के एक नियंत्रित परीक्षण ने भोजन के बाद फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज और रक्त शर्करा पर सकारात्मक प्रभाव दिखाया।
  • यह जड़ी बूटी आमतौर पर भारत में मधुमेह के लिए एक पारंपरिक दवा के रूप में उपयोग की जाती है।

8. अदरक – Ginger :-

  • यह रक्त शर्करा के स्तर को कम करने और मधुमेह वाले लोगों में इंसुलिन प्रतिक्रिया को विनियमित करने में मदद करता है।
  • कई अध्ययनों ने सुझाव दिया कि अदरक टाइप 2 मधुमेह वाले लोगों के लिए लॉन्ग टर्म ब्लड ग्लूकोज नियंत्रण में सुधार कर सकता है।

9.इसबगोल की भूसी – Psyllium or Isabgol

  • यह एक प्लांट फाइबर है जो कोलेस्ट्रॉल और रक्त शर्करा दोनों को कम करता है |
  • कई अध्ययनों से पता चलता है कि टाइप 2 मधुमेह वाले लोग जो हर दिन 10 ग्राम साइलियम लेते हैं, वे अपने रक्त शर्करा और निम्न रक्त कोलेस्ट्रॉल में सुधार कर सकते हैं। 

10. भिन्डी – Okra:-

  • ओकरा आमतौर पर भिंडी के रूप में जाना जाता है।
  • मधुमेह विरोधी गुणों से युक्त ओकरा के प्रमाण में हाल के वर्षों में वृद्धि हुई है, जिसमें कई प्रयोगशाला और पशु अध्ययनों से एक शक्तिशाली रक्त शर्करा-कम करने (या मधुमेह-विरोधी) वाले भोजन के रूप में ओकरा की पुष्टि की गई है।
  • माना जाता है कि ओकरा में मौजूद बेहतर अघुलनशील फाइबर को रक्त शर्करा को स्थिर करने में मदद करने के लिए माना जाता है|

11.  सेब का सिरका – Apple Cider Vinegar:-

  • सोने से पहले 2 चम्मच लेने से आपके फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज का स्तर कम हो सकता है।

12. नीम – Azadirachta indica:-

  • नीम के पेड़ के लगभग सभी हिस्सों- पत्तियों, फूलों, बीजों, फलों, जड़ों और छाल का उपयोग पारंपरिक रूप से विभिन्न उपचारों के लिए किया जाता रहा है; सूजन, संक्रमण, बुखार, त्वचा रोग या दंत विकार हो। 
  • कुछ अध्ययनों ने दावा किया है कि ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में डायबिटीज मेलिटस में  नीम के कुछ यौगिक लाभकारी हो सकते हैं। 
  • इंडियन जर्नल ऑफ फिजियोलॉजी एंड फार्माकोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, नीम रोग की शुरुआत को रोकने या देरी करने में भी मददगार साबित हो सकता है। 
  • एथनो-मेडिसिन पर जर्नल स्टडीज में, नीम के पत्तों का पाउडर गैर-इंसुलिन पर निर्भर पुरुष मधुमेह रोगियों पर मधुमेह के लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए उपयोगी पाया गया था।

पढ़ें :- 1. हार्ट अटैक कारण लक्षण बचाव और इलाज , 2. सीने में दर्द की पहचान , 3. नींद न आने का उपचार , 4. दिल का दौरा के बाद क्या खाना चाहिए, 5. वज़न कम करने का १० दिन का डाइट प्लान, 6. कोरोना वायरस

संक्षिप्त :-

पूरी दुनिया में जिस तरह से कम उम्र के लोगों में भी डायबिटीज (diabetes) हो रहा है ये किसी डरावने सपने की तरह है, और इसका मुख्य कारण है गलत खाने का चयन और जीवन शैली| इसलिए अपनी जीवन शैली में बदलाव लाकर, स्वस्थ्य खाने का चयन करके, शारिरक निष्कर्यता को ख़त्म करके हम इससे बचाव कर सकते हैं या अपनी बीमारी को नियंत्रित कर सकते क्यूंकि डायबिटीज (diabetes) के दुष्परिणाम बहुत ही खतरनाक होते हैं |

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