छाती (सीने) में दर्द – Chest Pain in Hindi

CHEST-PAIN
CHEST-PAIN

छाती (chest pain) का दर्द क्या है ?

  • छाती का दर्द (Chest pain) इस तरह का अहसास या बेचैनी है जो आमतौर पर सीने में सामने की तरफ होता है|
  • इसके अलावा सीने में दर्द सीने के दायीं तरफ (Chest pain right side),सीने के बायीं तरफ(Chest pain left side)या सीने के बीच में हो सकता है या फिर सीने के बीच में जलने (Burning chest) का भी अहसास हो सकता है|
  • यह बहुत तेज़ दर्द से लेकर बहुत मामूली दर्द तक हो सकता है|
  • इसके अलावा सीने में दबाव और चुभन का भी अहसास हो सकता है |
  • कभी कभी सीने में दर्द के साथ ये दर्द हाथो में, जबड़ो में, गर्दन में, कंधो में या फिर पेट के उपरी हिस्से में भी फैलता है|

विषय सूची:-

  1. छाती (सीने) में दर्द के प्रकार – Chest Pain types in Hindi
  2. छाती (सीने) में दर्द के कारण – Chest Pain cause in Hindi
  3. हार्ट से सम्बंधित सीने में दर्द के कारण – Cardiac chest pain causes in Hindi
  4. गैर हार्ट सम्बंधित छाती (सीने) में दर्द के कारण – Non cardiac chest pain Causes in Hindi
  5. छाती (सीने) में दर्द का परीक्षण – Chest pain diagnosis in Hindi
  6. सीने (छाती) के दर्द से कैसे बचें – Prevention of Chest pain in Hindi
  7. छाती (सीने) में दर्द का उपचार – Chest pain treatment in Hindi
  8. हार्ट अटैक के बाद क्या खाना चाहिए क्या नहीं खाना चाहिए
  9. 10 दिनों में वज़न कम करने का डाइट प्लान
  10. हार्ट अटैक के कारण , लक्षण , बचाव और इलाज के बारे में
  11. अनिद्रा या नींद ना आना, कारण बचाव और इलाज
  12. डायबिटीज के प्रकार, कारण, लक्षण और इलाज 
  13. कोरोना वायरस पर लेटेस्ट अपडेट 

अगर सीने के दर्द का फैलना ऊपर दिए गए हिस्सों में भी होता है या फिर दर्द के साथ बहुत बेचैनी,घबराहट और पसीना भी होता है तो आमतौर पर इस तरह का दर्द दिल का दौरा” पड़ने की वजह से हो सकता है|

हार्ट अटैक का मरीज़ chest pain में अपने छाती को दबाता हुआ , ये हार्ट अटैक का बहुत खास लक्षण है
फोटो :- हार्ट अटैक का मरीज़ chest pain के कारण अपने सीने को दबाये हुए है, ये हार्ट अटैक का मुख्य लक्षण हैं

छाती (सीने) में दर्द के प्रकार – Chest Pain types in Hindi

छाती(सीने) का दर्द कितनी तरह का होता है ?

  • सीने में दर्द को दो भागों में बांटा जा सकता है –
  1. Cardiac chest pain – हार्ट से सम्बंधित सीने में दर्द
  2. Non Cardiac chest pain – गैर हार्ट से सम्बन्धित सीने में दर्द

छाती (सीने) में दर्द के कारण – Chest Pain cause in Hindi

सीने में दर्द के क्या कारण हो सकते हैं ?

  • छाती में दर्द के दो तरह के कारण होते हैं , ऐसा दर्द जो कि हार्ट में समस्या की वजह से होता है और दूसरा जिसमें हार्ट में कोई तकलीफ नहीं होती है|

हार्ट से सम्बंधित सीने में दर्द के कारण – Cardiac chest pain causes in Hindi

छाती (सीने) में दर्द क्यूँ होता है ?

  • कुछ गंभीर और आमतौर से पाए जाने वाले हार्ट से सम्बंधित सीने में दर्द के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं|
  • जैसे –A. दिल का दौरा B-एनजाइना पेक्टोरिस C-एओर्टिक डाईसेक्शन D- पेरीकारडाईतिस आदि

ज़रूर पढ़ें – हार्ट अटैक , कारण , लक्षण ,बचाव और इलाज के बारे में

A.दिल का दौराHeart attack in Hindi

हार्ट अटैक क्यूँ होता है ?

Heart attack
Crushing pain in heart attack
  • इसे आमतौर से मेडिकल की भाषा में मायोकार्डियल इन्फार्कशन के नाम से जाना जाता है|
  • कोरोनरी धमनी में रूकावट की वजह से हार्ट की मास्पेशियों को रक्त आपूर्ति कम हो जाती है|
  • जिसकी वजह से हार्ट की माश्पेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलता है और उनके संकुचन(सिकुड़ने) की क्षमता कम हो जाती है या समाप्त हो जाती है|
Illustration showing the process of ateriosclerosis

हार्ट अटैक (दिल का दौरा पड़ने) के लक्षण – Heart attack Symptoms in Hindi

हार्ट अटैक का संकेत क्या है ?

  • सीने में दर्द हार्ट अटैक का सबसे मुख्य लक्षण है और अक्सर इस दर्द में ऐसा महसूस होता है जैसे –
  • सीना जकड़ा हुआ है , कोई सीने को कसकर दबा रहा है या सीने को निचोड़ा जा रहा है आदि
  • सीने में दर्द के साथ ये दर्द आमतौर पर बाएं हाथ में होता है| लेकिन निचले जबड़े, दाहिने हाथ ,पीठ, कंधे और पेट के ऊपरी हिस्से में भी फ़ैल सकता है|
  • अक्सर ये दर्द सीने के बीच मे या बायीं तरफ होता है और कुछ मिनटों से अधिक समय तक रहता है|
  • यह दर्द कभी कभी सीने में जलन की तरह महसूस होता है जिसे बर्निंग चेस्ट (Burning chest) कहते हैं|
  • सीने में दर्द के अलावा इसमें साँस फूलने की तकलीफ, मतली/उलटी, बेहोशी, पसीना और बहुत ज्यादा थकान महसूस होता है|

B.एनजाइना पेक्टोरिस – Know about Angina Pectoris in Hindi

एनजाइना पेक्टोरिस किसे कहते हैं ?

  • यह अक्सर हार्ट की मांसपेशियों को रक्त की आपूर्ति करने वाली कोरोनरी धमनियों में रुकावट या ऐठन के कारण होता है|
  • इसके अलावा खून की कमी, ह्रदय की धडकन का असामान्य होना, धड़कन का बहुत तेज़ होना आदि में ये दर्द हो सकता है|

एनजाइना पेक्टोरिस कितनी तरह का होता है ?

एनजाइना दो तरह का होता:-

१.स्थिर सीने का दर्द – Stable Angina in Hindi

  • ऐसा दर्द का जो मामूली काम करने से बढ़ जाता है और आराम करने से कम हो जाता है या बंद हो जाता है|

२.अस्थिर सीने का दर्द – Unstable Angina in Hindi

  • ऐसा दर्द जो मामूली काम करने से बढ़ जाता है और आराम करने पर भी दर्द में कोई कमी नहीं होती है|
  • यह दर्द अक्सर १० मिनट या उससे ज्यादा बना रहता है और बहुत तेज़ होता है|
  • इसकी दर्द की खास पहचान है की जब भी यह दर्द दोबारा होता है तो पहले से ज्यादा तेज़ होता है और पहले से ज्यादा लम्बे समय तक बना रहता है|

C- एओर्टिक डाईसेक्शन किसे कहते हैं ? – Aortic Dissection in Hindi

  • ह्रदय से निकलने वाली बड़ी खून की नली ( महाधमनी) की भीतरी परत किसी कारणवश फट जाती है जिसे महाधमनी विच्छेदन (एओर्टिक डाईसेक्शन) कहते हैं|
  • एओर्टिक डाईसेक्शन एक आपातकालीन स्थिति है जिसका अगर सही समय पर निदान और इलाज नहीं होता है तो यह बीमारी जान लेवा साबित हो सकती है|
  • इसका सामान्य लक्षण ये है की अचानक और तेज़ सीने में और पीठ में दर्द होता है जो गर्दन या पीठ के नीचे की तरफ फैलता है|
  • बेहोशी और साँस में तकलीफ की समस्या भी हो सकती है|

नोट एओर्टिक डाईसेक्शन को पहचानने के लिए चिकित्सीय परीक्षण आवश्यक है|

D-पेरीकारडाईटिस – Pericarditis in Hindi

  • किसी कारण वश पेरीकार्डियम में सूजन हो जाता है जिसे पेरीकारडाईटिस कहते हैं|
  • हृदय के चारों तरफ मौजूद थैली को पेरीकार्डियम कहते हैं|
  • अचानक सीने में होने वाला तेज़ दर्द जो कि गर्दन, पीठ, और कंधे में भी महसूस होता है इसकी खास निशानी है |
  • इसमें आमतौर से बैठने पर खासकर आगे की तरफ झुककर बैठने पर दर्द में आराम मिलता है जबकि लेटने या गहरी साँस लेने से दर्द की तीव्रता बहुत बढ़ जाती है |
  • इसके अलावा बुखार, कमजोरी, धड़कन तेज़ होना और साँस की तकलीफ भी हो सकती है|
  • पेरीकारडाईटिस का मुख्य कारण वाइरल संकर्मण होता|
  • इसके अलावा बैक्टेरिअल संकर्मण जैसे टी.बी. और साँस के दुसरे संकर्मण से भी पेरीकारडाईटिस होता है|
  • इसके अलावा सीने में चोट की वजह से भी पेरीकारडाईटिस हो सकता है |
  • दिल का दौरा पड़ने के बाद भी पेरीकारडाईटिस हो सकता है|
  • इसके अलावा स्व-प्रतिरक्षित रोगों (Autoimmune disorders ) कि वजह से भी पेरीकारडाईटिस होता है |

Note – हार्ट अटैक में भी लगभग वही लक्षण मिलते हैं जो पेरीकारडाईतिस में मिलते हैं|

cardiac chest pain
cardiac chest pain

गैर हार्ट सम्बंधित छाती (सीने) में दर्द के कारण – Non cardiac chest pain Causes in Hindi

नॉन कार्डियक चेस्ट पेन क्या होता है ?

  • गैर हार्ट सम्बंधित सीने में दर्द ऐसा शब्द है जो जो ऐसे सीने के दर्द को परिभाषित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो हार्ट सम्बंधित दर्द की तरह होता है लेकिन मरीज़ को कोई भी हार्ट सम्बंधित बीमारी नहीं होती है|
  • दर्द आमतौर पर ह्रदय सम्बंधित दर्द की तरह ही होता है जो सीने के बीच की हड्डी के बिलकुल पीछे होता है |
  • अक्सर इस दर्द को भी सीने में जकडन, दबाव या निचोड़ की सवेंदना (sensation) के रूप में बताया जाता हैं जैसा की हार्ट अटैक में होता है |

NCCP को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है :

  1. खाने की नली सम्बंधित सीने में दर्द – Esophageal related NCCP
  2. गैर खाने की नली सम्बंधित सीने में दर्द – Non Esophageal related NCCP

1.खाने की नली सम्बंधित छाती (सीने) में दर्द –

A.एसिडिटी की समस्या – Chest pain due to Gasteroesophageal reflux disease(GERD) or Acid reflux in Hindi

Non cardiac chest pain
Gastroesophageal reflux disease anatomy illustration
Gastroesophageal reflux disease anatomy illustration
  • एसिड रिफ्लक्स खाने की नली संबधित बहुत सामान्य एसिडिटी की बीमारी है|
  • इसमें सीने में दर्द के साथ सीने में जलन की भी शिकायत हो सकती है, जिसे हार्ट बर्न (Heart Burn) कहते हैं|
  • इसमें पेट में मौजूद तेजाब खाने की नली के ज़रिये मुंह तक पहुँच जाता है जिसे GERD कहते हैं |
  • इसकी वजह से सिर्फ सीने में दर्द की ही शिकायत हो सकती है इसके अलावा कोई और तकलीफ नहीं होती है|

B. खाने की नली में संकुचन कि समस्या – Chest pain due to Esophageal contraction disorder in Hindi

  • यह खाने की नली के मासपेशियों की बीमारी है जो कई तरह की होती है जैसे –
  1. खाने की नली की मासपेशियों का आपस में तालमेल ख़राब हो जाता है , इस खराबी की वजह से ये माँस्पेशियाँ अलग अलग समय पर अलग अलग गति से सिकुड़ती और फैलती है यही दर्द का कारण बनता है|
  2. खाने की नली की मासपेशियों का बहुत तेज़ी से सिकुड़ना|इस समस्या को नटक्रैकर इसोफेगस (nutcracker esophagus) कहा जाता है|
  3. इसके अलावा खाने की नली की मासपेशियों के सिकुड़ने की क्षमता का ख़तम हो जाना जो की मासपेशियों के नसों की खराबी की वजह से होता है, इसे एक्लेजिया (Achlasia) कहते हैं

C. खाने की नली का अतिउत्तेजित होना – Chest pain due to Hypersensitive Esophagus in Hindi

  • कभी कभी कुछ लोगो के खाने की नली बहुत ज्यादा संवेदनशील हो जाती है और इसके अन्दर मामूली बदलाव जैसे -नली के अन्दर के दबाव में मामूली बदलाव या एसिडिटी का ज्यादा होना बहुत तीव्र दर्द का कारण बन जाता है|

2.गैर खाने की नली सम्बंधित सीने में दर्द

  • गैर ह्रदय सम्बंधित छाती के दर्द के जो मुख्य कारण हैं, जो ह्रदय सम्बंधित दर्द की तरह होते हैं वो अक्सर खाने की नली से सम्बंधित होते हैं|
  • मगर कुछ छाती के दर्द ऐसे भी होते हैं जो न तो ह्रदय से सम्बंधित होते हैं और न ही खाने की नली से|जैसे-

A.मास्पेशी-हड्डी और जोड़ो से सम्बंधित सीने में दर्द

  • कासटोकॉनडराइटिस– यह सीने की नरम हड्डी का सूजन है जो ऊपरी पसली की हड्डी से जुडती है|
  • इसकी वजह से होने वाला छाती का दर्द बहुत मामूली से लेकर बहुत तीव्र हो सकता है |
  • वायरल संकर्मण इस का मुख्य कारण है इसके अलावा ये बैक्टीरियल और फंगल संकर्मण की वजह से भी होता है|
  • इसके अलावा कासटोकॉनडराइटिस का किसी ट्रामा या चोट के बाद भी पाया जाना सामान्य है|
  • सीने की किसी हड्डी में सूजन या फ्रैक्चर की वजह से भी दर्द होता है जो ह्रदय संबधित दर्द की तरह हो सकता है लेकिन आमतौर पर ऐसे दर्द में ट्रामा या चोट का ब्यौरा भी मिलता है और दर्द दबाने से या गहरी साँस लेने से बढ़ता है|

B- पित्ताशय और अग्नाशय सम्बंधित सीने में दर्द

  • अगर पित्ताशय (Gallbladder) और अग्नाशय (Pancreas) में पथरी, संकर्मण या सूजन होता है तो इससे होने वाला दर्द कभी कभी बहुत तीव्र होता है जो सीने, और पीठ तक फैलता है|

C- फेफड़ों से संबधित सीने में दर्द

फेफड़ो से संबधित सीने के दर्द के कुछ कारण :

  • प्लुराईटीस – इसमें फेफड़ों के चारों तरफ मौजूद झिल्ली में सूजन या संकर्मण हो जाता है जिसकी वजह से सीने में दर्द होता है जो साँस लेने पर बहुत तीव्र हो जाता है|
  • इसके अलावा फेफड़ों से सम्बंधित और भी कारण हैं जिसकी वजह से इस तरह का दर्द हो सकता है जैसे-
  1. फेफड़े का इन्फेक्शन-जैसे-नेमोनिया .टी.बी. आदि|
  2. फेफड़े के चारों तरफ पानी भर जाना|
  3. फेफड़े का सिकुड़ जाना|
non cardiac chest pain
oneumothorax
A Human Anatomy of Pneumothorax illustration
  • इन सारे कारणों से चेस्ट पेंन (Chest pain) होता है जो गहरी साँस लेने से बढ़ता है|

D- तनाव – घबराहट

क्या तनाव कि वजह से सीने में दर्द हो सकता है ?

  • गैर ह्रदय संबधित सीने के दर्द के कुछ मरीजों में तनाव भी पाया जाता है|
  • लेकिन ये साफ़ तौर पर पता नहीं चलता है की सीने के दर्द की वजह से तनाव हुआ है या तनाव की वजह से सीने का दर्द |
  • ऐसे मरीजों में दर्द का ब्यौरा ,शारीरिक परीक्षण और चिकत्सीय परीक्षण की आवश्यकता होती है|

नोट-दर्द ह्रदय सम्बन्धी है या गैर ह्रदय सम्बन्धी ये सुनिश्चित करने के लिए फिजिशियन का परामर्श(Consultation) ज़रूरी है |

छाती (सीने) में दर्द का परीक्षण – Chest pain diagnosis in Hindi

छाती में दर्द की वजह का पता कैसे किया जाता है ?

  • सीने में दर्द की वजह का के कारण हो जानने के लिए निम्नलिखित जांचे की जाती हैं :-

1.छाती (सीने) के दर्द में मरीज़ से पूछताछ – History taking in Chest pain

  • किसी व्यक्ति के जोखिम कारको को(Risk factors) को जानना सीने में दर्द के गंभीर कारणों को समझने या उन पर कण्ट्रोल रखने में बेहद उपयोगी हो सकता है|
  • जैसे -हार्ट अटैक जवान लोगो में जिनकी उम्र ३० साल से कम है उनमें बहुत सामान्य नहीं है|
  • जबकि ऐसे लोगो में जिनमें पहले से कोई गलत आदत या बीमारी मौजूद है जैसे-उक्त रक्तचाप, धुम्रपान, शुगर या फिर परिवार में पहले किसी को हार्ट अटैक हो चुका है, तो ऐसे लोगो में दिल का दौरा पड़ने का खतरा ज़्यादा होता है|
  • इसके अलावा अगर मरीज के छाती के दर्द का फैलाव गर्दन ,पीठ,बाये हाथ या फिर जबड़े में होता है तो ये दर्द सामान्यतः ह्रदय सम्बंधित हो सकता है या

दर्द का स्वभाव – Nature of pain

  • दर्द के साथ ये शिकायत भी होती है की बहुत ज्यादा पसीना हो रहा
  • सीने में दर्द के साथ सीने में दबाव (pressure)महसूस होता है
  • दर्द का स्वाभाव निचोड़ने(squeezing) जैसा है तो ये दर्द खासतौर से ह्रदय सम्बंधित हो सकता है|
  • लेकिन हार्ट सम्बंधित दर्द इन लक्षणों के बिना भी हो सकता है|
  • दर्द अगर हिलने या करवट बदलने से बढ़ता या कम होता या फिर दबाने से बढ़ता है या गहरी साँस लेने से तीव्र होता है तो ऐसा दर्द गैर ह्रदय सम्बंधित हो इसकी सम्भावना ज्यादा होती हैं|
  • लेकिन इसको पूरी तरह से खंडित नहीं कर सकते की दर्द ह्रदय सम्बंधित नहीं है|
  • सिर्फ पूछताछ से पुरे यकीन से ये नहीं कहा जा सकता है की दर्द ह्रदय सम्बंधित है या गैर ह्रदय सम्बंधित|
  • इसके लिए शारीरक परीक्षण और चिकित्सा जाँच (Medical Tests) की आवश्यकता होती है|

2.छाती (सीने) के दर्द में शारीरिक परीक्षण – Physical Examination in Chest pain

  • पेशेंट से पूछताछ ( History Taking) और शारीरिक परीक्षण के दौरान सावधानी और एकाग्रता की आवश्यकता होती है|

सावधानी और एकाग्रता से किये गए शारीरिक परीक्षण से मिलने वाले परिणाम, बीमारी (Chest pain) के कुछ खतरनाक कारणों को पहचानने में मददगार शाबित होते हैं |जैसे –

  • धड़कन का असामान्य होना
  • दो से ज्यादा धड़कन का सुनाई देना
  • बहुत ज्यादा पसीना होना
  • रक्त चाप का बहुत ज़्यादा या बहुत कम होना
  • ह्रदय की धडकन का तेज़ या धीमा होना
  • हृदय में असामान्य ध्वनि का पाया जाना
  • मरीज़ का अपने हाथों की हथेली या मुट्ठी से सीने को दबाना या मसलना
  • मरीज़ का बेचैन होना
  • चेतना का कम हो जाना
  1. ये सारे परिणाम या संकेत शारीरक परीक्षण में मिलते हैं जो इस तरफ इशारा करते हैं की सीने का दर्द ह्रदय सम्बंधित हो सकता है|
  2. हालाँकि इन सारे संकेतो से ये पुष्टि नहीं होती है की सीने के दर्द का ह्रदय से ही सम्बन्ध है|इसकी पुष्टि करने के लिए चिकित्सा जांच की आवश्यकता पड़ती है|
  3. इसके अलावा अगर शारीरिक परीक्षण के दौरान परीक्षक के हाथो के सीने में लगने या दबाने से दर्द बढ़ता है या दोबारा शुरू हो जाता है तो ऐसे चेस्ट पेन के गैर ह्रदय सम्बन्धी होने की सम्भावना बढ़ जाती है|
  4. सीने में दर्द के निदान(कारण का पता लगाना) में सबसे ज़रूरी ये होता है की सीने में दर्द (chest pain) के कारणों में से ऐसे कारणों को निकाला जाये जो सबसे ज्यादा घातक है|
  • जैसे -हार्ट अटैक, हार्ट की बड़ी खून की नली का फट जाना, खाने की नली का फट जाना, फेफड़ों में रक्त के प्रवाह का बंद हो जाना आदि|
  • सबसे गंभीर कारणों को ख़ारिज करने या उनकी पुष्टि से ,दर्द की उत्पत्ति (origin) का पता किया जा सकता है|

3.चिकित्सा निदान परिक्षण – Chest pain related test in Hindi

  • छाती में दर्द की प्रकृति के अनुसार कई तरह के जाँच किये जा सकते हैं –

१.इलेक्ट्रोकार्डिओग्राम (ECG) –

  • इसमें ह्रदय की विद्युत गतिविधि को एक पेपर पर रिकॉर्ड किया जाता है|
  • ईसीजी के ज़रिये सीने के दर्द के ह्रदय सम्बन्धी कारणों जैसे – हार्ट अटैक आदि का पता चलता है|

२.सीने का एक्स-रे – Chest X-ray

  • इसके ज़रिये सीने के दर्द के गैर ह्रदय सम्बन्धी कारणों का पता चलता है –
  • जैसे -फेफड़े में संकर्मण, फेफड़ों के चारों तरफ पानी भरना, टी.बी. आदि|
  • इसके अलावा सीने के एक्स-रे के द्वारा ह्रदय के आकार को भी देखा जाता है|

३.इकोकार्डियोग्राफी – Echocardiography

  • ये जाँच ऐसे मरीजों में काफी अहम् साबित होता जिनको पहले से कोई ह्रदय सम्बंधित बीमारी रहती है|
  • इसके अलावा सीने के दर्द के कारणों में से कुछ कारणों को खारिज करने या उनकी पुष्टि करने के लिहाज़ से ये बहुत खास जाँच है|

4.सोनोग्राफी – Ultrasonogarphy(USG)

  • सीने के दर्द में खासकर ऐसा दर्द जो पेट के उपरी हिस्से से सीने तक फैलता है में पेट का सोनोग्राफी काफी अहम् साबित होता है|
  • सोनोग्राफी के द्वारा सीने में दर्द के कुछ कारण का पता चल सकता है –
  • जैसे -पित्ताशय और अग्नाशय की पथरी और उनमें सूजन|
  • इसके अलावा सोनोग्राफी से फेफड़ों के चारो तरफ पानी के भरने का पता भी चलता है|

5.कोरोनरीअंजियोग्राफी- Coronary Angiography (CAG)

  • यह एक ऐसा परीक्षण है जिसमें आपके दिल की रक्त वाहिकाओं को देखने के लिए एक्स – रे का उपयोग किया जाता है |
  • परीक्षण आमतौर पर ये देखने के लिया किया जाता है, कि ह्रदय के रक्त प्रवाह में कोई रुकावट या कमी तो नही , और है तो कितना है (प्रतिशत में)|

6. खून की जांचें -Blood Tests

A. कार्डिएक एंजाइम –

ट्रोपोनिन आई और टी – Troponin I and T

  • ह्रदय में कुछ घात होता है तो ये खास एंजाइम हृदय की मांशपेशियो से निकल कर खून में शामिल हो जाते हैं|
  • इन एंजाइम का खून में एक मात्रा से ज्यादा पाया जाना हार्ट अटैक या एनजाइना का संकेत होता है|

NOTE-इन एंजाइम का खून में एक मात्रा से ज्यादा पाया जाना , हार्ट अटैक और एनजाइना के अलावा दूसरी गैर ह्रदय सम्बन्धी बिमारियों मे भी मिलता है|

  • जैसे – बहुत ज्यादा संकर्मण (Severe infection) या गुर्दे की बीमारी(kidney disease) आदि|

सी के-एम बी – CK-MB (Creatine kinase myocardial band)

  • इस एंजाइम का भी खून में एक मात्रा से ज्यादा पाया जाना हार्ट अटैक या एंजाइना का संकेत होता है|

NOTE -CKMB ह्रदय सम्बंधित बीमारी के अलावा अस्थमा और मांसपेशियों केअतिघात (severe musculo-skeletal damage) में भी ज्यादा पाया जाता है|

  • इसके अलावा कंप्लीट ब्लड काउंट, लिवर फंक्शन टेस्ट, पनक्रिएटिक एंजाइम भी सीने में दर्द (chest pain) के निदान में अहम् साबित होते हैं|

छाती (सीने) के दर्द से कैसे बचें – Prevention of Chest pain in Hindi

क्या छाती (सीने) के दर्द से बचाव संभव है ?

जीवन शैली– जीवन जीवन शैली में बदलाव लाकर हृदय और गैर हृदय संबंधित छाती के दर्द से बचाव संभव हैजैसे-

  • खाने में संतृप्त वसा युक्त भोजन (Saturated fat rich फ़ूड) का इस्तेमाल कम करना|
  • जैसे-रेड मीट,तली हुयी चीजें (fried food),पेस्ट्रीज और केक आदि |
  • फाइबर युक्त भोजन (FIBER RICH FOOD ) का ज्यादा इस्तेमाल करना|
  • खाने में नमक का इस्तेमाल कम करना |
  • रोजाना कसरत(EXERCISE) करना कमसेकम ३० मिनट रोजाना |
  • बीडी या सिगरेट का इस्तेमाल न करना या बंद करना |
  • खुद को तनाव मुक्त(STRESS FREE) रखना |

2.ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और शुगर को नियंतरण में रखना |

3.पारिवारिक इतिहास(FAMILY HISTORY) में अगर किसीको ह्रदय सम्न्बधित बीमारी थी तो पहले से ही बचाव करके बीमारी से बचा जा सकता है|

ह्रदय सम्बन्धित दर्द के साथ गैर ह्रदय सम्बंधित दर्द से भी बचाव संभव जैसे –

  • हर उस परिस्थिति से खुदको बचाना जिससे chest pain होता है
  • उस परिस्थिति से बचना जिसकी वजह से निमोनिया ,सीन की मास्पेशियो का दर्द या चेस्ट ट्रामा हो सकता है |
  • .ज्यादा पानी पीने और कम मसालेदार और तैलीय भोजन के इस्तेमाल से एसिडिटी सम्बंधित chest pain से बचाव संभव है|

रोकथाम, इलाज से बेहतर है (PREVENTION IS BETTER THAN CURE)

ज़रूर पढ़ें – हार्ट अटैक के बाद क्या खाएं क्या न खाएं

छाती (सीने) में दर्द का उपचार – Chest pain treatment in Hindi

सीने में दर्द का इलाज़ क्या है ?

  • आपका डॉक्टर आपके सीने के दर्द का इलाज दवावों से , सर्जरी से या दोनो के संयोजन(combination) से कर सकता है | इलाज दर्द के कारण और गंभीरता पर निर्भर करता है |

ह्रदय सम्बंधित छाती (सीने) के दर्द का इलाज – Treatment of Cardiac chest pain in Hindi

A.Medical Treatment- दवाओ से इलाज

धमनियों को फ़ैलाने वाली दवाएं

  • आपका डॉक्टर आपका ऐसी दवाएं देगा जो ह्रदय की धमनियों को फैलाती हैं जिससे कि खून संकरी हो चुकी धमनियों में आसानी से बह सके जैसे -Nigtoglycerine, इस दवा को डॉक्टर आपको जुबान के नीचे रखने को कह सकता है|
  • इसके अलावा और भी रक्त चाप की दवाएं होती हैं जो धमनियों को फैलाने का कार्य करती हैं|

खून को पतला करने वाली दवाएं

अगर आपके डॉक्टर को लगता है की दर्द ह्रदय सम्बंधित है तो वह आपको ऐसी दवाएं देगा जो खून को पतला रखती हैं , ऐसी दवाओ को Blood Thinner कहते हैं|

  • ये दवाएं खून को पतला रखकर खून में मौजूद विभिन्न प्रकार के कोशिकाओं को आपस में चिपकने से रोकती है या उनके जमने का समय बढ़ा देती हैं|
  • इन दवाओं को एंटीप्लेटलेट ड्रग्स भी कहते हैं , कुछ उदहारण जैसे -Asprin and Clopidogrel|

खून के थक्के को तोड़ने वाली दवाएं

अगर आपको दिल का दौरा पड़ा है तो डॉक्टर आपका इलाज ऐसी दवाओ से करेगा जो धमनियों में मौजूद रुकावट को तोड़ने का काम करती हैं|

  • इन दवाओ को थ्रोम्बोलिटिक ड्रग्स कहते हैं और इस प्रक्रिया को थ्रोम्बोलिसिस कहते हैं|
  • थ्रोम्बोलिसिस के लिए अस्पताल के गहन देखभाल कक्ष(ICCU or ICU) में भर्ती होने की आवश्यकता पड़ती है|

इसके अलावा उन जोखिम कारको का इलाज किया जाता है जिनकी वजह से heart attack होने की सम्भावना बढ़ जाती है ,जैसे –

  • उक्त रक्त चाप – High blood pressure
  • शुगर का बढ़ा रहना – Uncontrolled diabetes
  • कोलेस्टराल का बढ़ा रहना – High Cholesterol level in blood etc

ज़रूर पढ़ें :- हार्ट अटैक की पूरी जानकारी कारण , लक्षण , बचाव और इलाज

ज़रूर पढ़ें :- हार्ट अटैक के बाद क्या खाएं क्या न खाएं

B. शल्य चिकित्सा – Surgical Treatment Heart attack

1. एंजियोप्लास्टी – (Angioplasty)

  • ये एक प्रमुख ह्रदय सम्बंधित शल्य क्रिया है जिसमे अवरुद्ध धमनी(blocked artery) में स्प्रिंग (स्टंट) डालकर उसमे रक्त प्रवाह को नियमित किया जाता है|

2. बाईपास सर्जरी -(Bypass Surgery)

  • इस शल्य क्रिया में बदन के दुसरे हिस्से से रक्त वाहिका को लेकर उसे अवरुद्ध धमनी(blocked artery) में जोड़ (grafting) देते हैं|

3.महाधमनी विच्छेदन की मरम्मत – (Aortic Dissection Repair)

  • महाधमनी विच्छेदन में आपातकालीन मरम्मत की ज़रूरत पड़ती है नही तो ये एक जानलेवा साबित हो सकती है|

Also Read :-1.Chest pain in English

गैर ह्रदय सम्बन्धी छाती (सीने) में दर्द का इलाज – Non cardiac chest pain treatment

डॉक्टर आपका इलाज दर्द के कारण के अनुसार करेगा जैसे-

  • दर्द एसिडिटी की वजह से है तो डॉक्टर आपका इलाज ANTACIDS से शुरू करेगा|
  • अगर आपको तनाव की वजह से दर्द है तो डॉक्टर आपक इलाज Anti anxiety drugs से शुरू करेगा |
  • इसी तरह फेफड़ो से सम्बंधित ,पित्ताशय और अग्नाशय सम्बन्धित दर्द का इलाज उसके कारण के अनुसार किया जाता है|

Summary –

  • आज की जीवनशैली में Chest pain का होना बहुत सामान्य है |
  • ज़्यादातर दर्द के कारणों का इलाज संभव है लेकिन उचित इलाज लिए बीमारी की सही पहचान की ज़रूरत होती है|
  • लोगों को चाहिए की सीने के दर्द के निदान के लिए डॉक्टर का परामर्श लें खासकर तब जब सीने के दर्द के साथ दर्द का फैलाव बाये हाथ ,गर्दन,जबड़े तक हो और मरीज़ को बेचैनी और पसीना भी हो रहा हो|

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दिल का दौरा – Heart attack in Hindi

December 26, 2019  Dr. Ismail Khan

Heart attack
Heart attack

दिल का दौरा (Heart attackकिसे कहते हैं?

  • Heart attack को Myocardial infarction भी कहा जाता है ये तब होता है जब ह्रदय की मास्पेशियों में रक्त का परवाह कम हो जाता(Incomplete blockage) है या पूरी तरह से बंद हो जाता(Complete blockage) है|
  • मास्पेशियों को रक्त परवाह न होने कि वजह से हृदय की माश्पेशियों को ऑक्सीजन(Oxygen) नहीं मिलता है|
  • ऑक्सीजन ना मिलने की वजह से उनके संकुचन(Contraction) की क्षमता(Power) समाप्त हो जाती है|

विषय सूची :-

  1. मायोकार्डियल इन्फार्कशन की परिभाषा – Definition of Myocardial Infarction(MI) or Heart Attack in Hindi
  2. दिल का दौरा कितने प्रकार का होता है – Heart attack types in Hindi
  3. हार्ट अटैक के लक्षण – Heart attack Signs and symptoms in Hindi
  4. हार्ट अटैक का क्या कारण है – Heart attack causes in Hindi
  5. दिल का दौरा पड़ने के जोखिम कारक – Risk factors of Heart Attack in Hindi
  6. हार्ट अटैक में परीक्षण-Diagnosis of Heart attack in Hindi
  7. दिल का दौरा का इलाज क्या है – Heart attack treatment in Hindi
  8. हार्ट अटैक का दवाओं से इलाज – Heart attack treatment with medicine in Hindi
  9. हार्ट अटैक का शल्य क्रिया से इलाज – Surgical treatment of heart attack in Hindi
  10. दिल का दौरा से कैसे बचें – Prevention from Heart attack in Hindi
  11. ह्रदय सम्बंधित छाती के दर्द की पहचान
  12. गैर ह्रदय सम्बंधित छाती के दर्द कि पहचान
  13. हार्ट अटैक के बाद क्या खाएं क्या ना खाएं
  14. अनिद्रा (इनसोम्निया) या नींद ना आने का कारण और इलाज – Insomnia in Hindi

मायोकार्डियल इन्फार्कशन की परिभाषा – Definition of Myocardial Infarction(MI) or Heart Attack in Hindi

मायोकार्डियल इन्फार्कशन की परिभाषा क्या है?

  • Myocardial बना है मायोकार्डियम से जो ह्रदय की मध्य परत को कहते हैं जो ह्रदय में संकुचन(contraction) करता है|
  • इन्फार्कशन(Tissue death)-माश्पेशियों में रक्त परवाह की कमी या रक्त परवाह के बंद होने की वजह से ऊतक ख़त्म(tissue death) होने लगते हैं,उसे infarction कहते हैं|
main cause of heart attack
Illustration showing the process of ateriosclerosis

हार्ट अटैक कितने प्रकार का होता है – Heart attack types in Hindi

हार्ट अटैक कितने तरह का होता है ? Types of heart attack 

दिल का दौरा तीन प्रकार का होता है –

  1. एस टी सेगमेंट एलिवेशन मायोकार्डियल इन्फार्कशन – ST segment elevation Myocardial Infarction or (STEMI)
  2. नॉन एस टी सेगमेंट एलिवेशन मायोकार्डियल इन्फार्कशन – Non ST segment elevation Myocardial Infarction or (NSTEMI)
  3. कोरोनरी स्पाज्म या अनस्टेबल अनजाइना – Coronary Spasm or Unstable Angina or Silent Heart attack

1.एस टी सेगमेंट एलिवेशन मायोकार्डियल इन्फार्कशन – ST segment elevation Myocardial Infarction or (STEMI)-

STEMI से क्या मतलब है ? What is STEMI

  • “एस टी सेगमेंट” से मतलब इलेक्ट्रोकार्डिओग्राम(ECG) के उस भाग से है जिसे एस टी सेगमेंट कहते हैं|
  • इस तरह के दिल का दौरा में, इलेक्ट्रोकार्डिओग्राम(ECG) में मौजूद एस टी सेगमेंट का हिस्सा अपनी आधार रेखा से ऊपर उठी होती है|
  • इस तरह के दिल का दौरा में कोरोनरी धमनी पूरी तरह बंद हो जाती(complete blockage) है|

2.नॉन एस टी सेगमेंट एलिवेशन मायोकार्डियल इन्फार्कशन -What is Non ST segment elevation Myocardial Infarction or (NSTEMI)

NSTEMI क्या होता है ? What is NSTEMI

  • इस तरह के दिल का दौरा में, इलेक्ट्रोकार्डिओग्राम(ECG) में मौजूद एस टी सेगमेंट का हिस्सा अपनी आधार रेखा से ऊपर उठी नहीं होती है|
  • एस टी सेगमेंट आधार रेखा से नीचे की तरफ होती है या आधार रेखा के समतल होती है|
  • मगर इस तरह के दिल के दौरा में, इलेक्ट्रोकार्डिओग्राम(ECG) में मौजूद “टी सेगमेंट” उलटी होती यानि नीचे की तरफ होती है | जिसे T inversion कहा जाता है|
  • इस तरह के दिल का दौरा में कोरोनरी धमनी पूरी तरह बंद नहीं होती है बल्कि इनमे रक्त का प्रवाह कम (incomplete blockage) हो जाता है|

ऐसे दिल का दौरा की पुष्टि के लिए कोरोनरी एनजिओग्राम और कार्डियक एंजाइम के जाँच की आवश्यकता पड़ती है|

3.कोरोनरी स्पाज्म या अनस्टेबल अनजाइना – What is Coronary Spasm or Unstable Angina or Silent Heart attack

साइलेंट हार्ट अटैक किसे कहते हैं और इसके लक्षण क्या होते हैं ?  What is silent heart attack

  • इस तरह के दिल का दौरा को Silent Heart Attack भी कहते हैं|
  • अनस्टेबल अनजाइना में ECG में कोई भी बदलाव नहीं होता है , मगर इसके लक्षण STEMI की तरह ही होते हैं|
  • इसका पता जांचो के द्वारा ही क्या जा सकता है|
  • अक्सर इस तरह के दिल का दौरा को एसिडिटी या माश्पेशी का दर्द समझ कर छोड़ दिया जाता है|
  • ऐसे दिल का दौरा में कोरोनरी धमनी में ज्यादा घात तो नहीं होता है मगर दोबारा दिल का दौरा होने का खतरा बढ़ जाता है|

साइलेंट हार्ट अटैक में कोरोनरी धमनी में कोई अवरुद्ध (blockage) नहीं होता है बल्कि किसी कारणवश कुछ समय के लिए इसमें ऐठन हो जाती है|

हार्ट अटैक के लक्षण – Heart attack Signs and symptoms in Hindi

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हार्ट अटैक को कैसे पहचान सकते हैं ? Sign of heart attack

1.छाती का दर्द – Chest pain

  • सीने में दर्द या बेचैनी(chest pain or discomfort) हार्ट अटैक (Heart attack) का सबसे मुख्य लक्षण होता है|
  • ये दर्द मुख्य रूप से सीने के बीच में होता है ,जो दर्द के साथ सीने में दबाव,जकड़न या फिर निचोड़(SQUEEZING PAIN)जैसा महसूस होता है|

दर्द का फैलाव – Radiation of pain

  • सीने में दर्द के साथ ये दर्द आमतौर पर बाएं हाथ (left side chest pain)में होता है|
  • लेकिन निचले जबड़े, दाहिने हाथ(right side chest pain) ,पीठ, कंधे, और ऊपरी पेट में भी फ़ैल सकता है|
  • अक्सर ये दर्द सीने के बीच में या बायीं तरफ होता है और कुछ मिनटों से अधिक समय तक रहता है|
  • यह दर्द कभी कभी सीने में जलन की तरह महसूस होता है|
  • अगर दर्द सीने के साथ कन्धों और बाये हाथ में भी पहुँचता है तो ये दर्द मुख्य रूप से एक्यूट मायोकार्डियल इन्फार्कशन या हार्ट अटैक का हो सकता है|
  • हार्ट अटैक (Heart attack) का दर्द मुख्यतः एक समान रहता है ,मुद्रा (पोजीशन) बदलने से दर्द में कोई कमी नहीं होती है |

ऐसा सीने का दर्द जो कि हार्ट अटैक (heart attack) कि वजह से होता है वो 20 मिनट या उससे ज्यादा बना रहता है|

Heart attack
Woman is clutching her chest, acute pain possible heart attack

और पढ़ें:- ह्रदय सम्बंधित छाती के दर्द की पहचान

और पढ़ें:- गैर ह्रदय सम्बंधित छाती के दर्द कि पहचान

ज़रूर पढ़ें :- हार्ट अटैक के बाद क्या खाएं क्या ना खाएं

जानें :- अनिद्रा (इनसोम्निया) या ना आने का कारण और इलाज – Insomnia in Hindi

2.मतली, उलटी या बेहोशी होना – Nausea or Vomiting and Fainting

  • छाती में दर्द के साथ मतली,उलटी और बेहोशी की भी शिकायत हो सकती|
  • बेहोशी कि शिकायत मष्तिस्क(brain)को रक्त की पूर्ति न होने कि वजह से होती है|

Heart attack के कुछ मरीजों में मतली,उलटी या बेहोशी दर्द के बिना भी हो सकता है,खासकर बूढ़े या शुगर के मरीजों में |

3.साँस फूलना – Nausea or Vomiting and Fainting

  • Chest pain के साथ साँस का फूलना Heart attack में बहुत सामान्य है |
  • साँस फूलने कि शिकायत माश्पेशियों में ऑक्सीजन की कमी या फिर फेफड़ो के अन्दर पानी जमने की वजह से होता है|
  • MI के बाद ह्रदय की मश्पेशियाँ कमजोर हो जाती हैं जिसकी वजह से इसकी संकुचन(contraction) क्षमता कम हो जाती है|
  • संकुचन क्षमता के कम होने के कारण बदन को पूर्ण ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है और फेफड़े में पानी भी जमा होता है, जिससे साँस फूलने की शिकायत शुरु होती है |
  • कभी कभी सिर्फ साँस फूलने की शिकायत ही होती है सीने में दर्द या दुसरे और कोई लक्षण नहीं होते है |
  • इसके अलावा चक्कर आना, थकान महसूस होना आदि |

Note :-कभी कभी heart attack में उपरोक्त में से कोई भी शिकायत नहीं होती है ,ऐसा खासकर बूढ़े लोगों में या शुगर के मरीजो में होता है |

Also read:- Heart attack in English

Also read :- Difference between Cardiac and Non-Cardiac Chest Pain

हार्ट अटैक का क्या कारण है – Heart attack causes in Hindi

दिल का दौरा क्यूँ होता है ? Cause of heart attack

  • दिल का दौरा पड़ने का सबसे मुख्य कारण है कोरोनरी धमनी का बंद हो जाना(complete blockage) या उसमे बाधा का उत्पन्न होना (incomplete blockage)|
  • इसको कोरोनरी आर्टरी डिजीज़ (CADभी कहते हैं |
  • ये बाधा एक से अधिक कोरोनरी धमनी में हो सकता है|
Atherosclerotic plaque and thrombus formation
Scientific medical illustration of atherosclerosis illustration

रक्त में मौजूद ख़राब कोलेस्ट्रॉल(LDL) और कई अन्य सम्बंधित पदार्थ कोरोनरी धमनी में जमने लगते हैं जो की धीरे धीरे बड़े थक्के (plaque) का रूप ले लेते हैं,इस प्रक्रिया को अथेरोस्क्लेरोसिस और इस थक्के को अथेरोस्क्लेरोटिक प्लेक कहते हैं|

  • ये थक्का हाई ब्लड प्रेशर ,स्मोकिंग या किसी और कारणवश फट जाता है ,और वहां पर खून का थक्का बन जाता है जिसकी वजह से कोरोनरी धमनी पूरी तरह बंद हो जाती है |यह कुछ मिनटों में भी हो सकता है|
  • हार्ट अटैक का एक और कारण है कोरोनरी धमनी में जकडन (spasm)जो कि स्मोकिंग ,या दुसरे कई नशीले पदार्थ या फिर तनाव कि वजह से हो सकता है|
  • इसमें कोरोनरी धमनी पूरी तरह से बंद नहीं होती है|
  • उपरोक्त के अलावा और भी कारण हैं जिसकी वजह से दिल का दौरा पड़ सकता है हालंकि ये बहुत सामान्य नहीं है |
  • जैसे -बहुत तेज़ बुखार ,दिल की धड़कन का बहुत तेज़ चलना , ब्लड प्रेशर बहुत कम होना आदि|

दिल का दौरा पड़ने के जोखिम कारक – What are the Risk factors of Heart Attack in Hindi

  • जोखिम कारक उसे कहते हैं जिसकी मौजूदगी बीमारी की सम्भावना बढ़ा देती है|

Heart attack में दो तरह के जोखिम कारक होते हैं –

1.परिवर्तनीय जोख़िम कारक – Modifiable risk factors of heart attack

  • ऐसे जोखिम कारक जिनको अपनी जीवन शैली मे बदलाव लाकर आप हार्ट अटैक (heart attack)से बच सकते है, जैसे –

A.धुम्रपान – Smoking

  • धुम्रपान को त्याग कर दिल का दौरा से बचाव समभव है |

B.शुगर – Diabetes

  • शुगर को नियनत्रण मे रखकर हार्ट अटैक (heart attack) से बचाव समभव है|

C.शारीरिक निषक्रियता – Physical inactivity

  • निरंतर कसरत से दिल का दौरा के अलावा और तमाम बिमरियो से बचना समभव है |रोजाना कम से कम 30 मिनट कसरत करना लाभदायक है|

D. वज़न ज्यादा होना – Over-weighted

  • वज़न का ज्यादा रहना तमाम बिमारियों को पैदा करता है इसको नियंत्रित करके तमाम बिमारियों से बच सकते हैं |(वज़न कम कैसे करें )

खून मे Cholesterol की ज्यादा मात्रा का होना हार्ट अटैक (heart attack) का सबसे आम कारण है, इसको नियंत्रण में रखकर दिल का दौरा जैसी गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है|

2.अपरिवर्तनीय जोख़िम कारक – Non-Modifiable risk factors of heart attack

  • ऐसे कारक जिनको बदला नहीं जा सकता है ,जैसे –

A. उम्र – Age

  • उम्र को कम या ज्यादा नहीं किया जा सकता है , आपकी उम्र जितनी ज्यादा होगी कोरोनरी आर्टरी डिजीज़ (CAD) होने कि सम्भावना उतनी ज्यादा हो सकती है|
  • जैसे –एनजायना (Angina), हार्ट अटैक (Heart attack)आदि

B.पारिवारिक इतिहास – Family History of heart attack

  • अगर आपका पारिवारिक इतिहास है कि आपके पिता ,माँ ,भाई,बहन को पहले कोरोनरी धमनी कि बीमारी-
  • जैसे हार्ट अटैक हो चूका है तो आपको भी ऐसे बीमारी हो, इसकी सम्भावना बढ़ जाती है

मगर आप ये जान सकते है कि क्या उनमे कोई जोखिम कारक थे जो उन्हें नुकसान पहुंचा रहे थे,जैसे-

  • क्या वो लोग धुम्रपान करते थे ?
  • उनका वज़न ज्यादा था ?
  • क्या उनके खाने में संतृप्त वसा का प्रयोग ज्यादा होता था? (संतृप्त वसा के कुछ उदाहरण)
  • क्या उनमें शारीरिक निष्कर्यिता थी ?
  • वह शुगर से पीड़ित थे ?

अगर आपको जवाब हां में मिलता है तो आप अपनी जीवन शैली में बदलाव लाकर ह्रदय सम्बंधित बीमारी होने कि सम्भावना को कम कर सकते हैं |

C.लिंग – Sex

  • औरत के मुकाबले मर्द में हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा होता है|

हार्ट अटैक में परीक्षण-Diagnosis of Heart attack in Hindi

हार्ट अटैक को कैसे पहचान सकते हैं ?

आपका डॉक्टर सबसे पहले आपसे कुछ सवाल पूछ सकता है और आपका शारीरिक परिक्षण करते हुए ऐसे जोखिम कारको की जाँच करेगा जिससे हार्ट अटैक हो सकता है|

  1. बीमारी के बारे में पूछताछ – History taking
  2. शारीरिक परीक्षण – Physical examination
  3. चिकित्सा परीक्षण – Medical Tests

1.बीमारी के बारे में पूछताछ – History Taking in heart attack

  • किसी व्यक्ति के जोखिम कारको को(risk factors) को जानना, दिल का दौरा के गंभीर कारणों को समझने या उन पर कण्ट्रोल रखने में बेहद उपयोगी हो सकता है|

जैसे – हार्ट अटैक जवान लोगो में जिनकी उम्र ३० साल से कम है उनमे बहुत सामान्य नहीं है|

जबकि ऐसे लोगो में जिनमे पहले से कोई ख़राब आदत या बीमारी मौजूद है|जैसे -ब्लड प्रेशर ,धुम्रपान, शुगर या फिर परिवार में पहले किसी को हार्ट अटैक हो चुका है ,तो ऐसे लोगो में दिल का दौरा बहुत सामान्यतः पाया जाता है|

  • इसके अलावा अगर मरीज के सीने के दर्द का फैलाव (radiate) गर्दन ,पीठ,बाये हाथ या फिर जबड़े में होता है तो ये दर्द सामान्य रूप से हार्ट अटैक की वजह से हो सकता है|
  • दर्द के साथ ये शिकायत भी होती है की बहुत ज्यादा पसीना(sweating) हो रहा है या
  • सीने के दर्द के साथ सीने में दबाव (pressure)महसूस होता है या
  • दर्द का स्वाभाव निचोड़ने(squeezing) जैसा है तो ऐसे दर्द खासतौर से दिल का दौरा सम्बंधित हो सकते हैं|

2.शारीरिक परीक्षण – Physical Examination in heart attack

  • बीमारी और लक्षण का ब्यौरा लेने के बाद डॉक्टर आपका शारीरिक परिक्षण करेगा|

डॉक्टर आपका ब्लड प्रेशर ,धड़कन,साँस आदि कि जाँच करेगा जिसमें उसे निम्लिखित में से एक या एक से ज्यादा संकेत मिल सकते हैं , जैसे –

  • धड़कन का असामान्य होना – Abnormal heart rhythm
  • दो से ज्यादा धड़कन का सुनाई देना – Presence of 3rd or 4th heart sound
  • बहुत ज्यादा पसीना होना – Diaphoresis
  • ब्लड प्रेशर का कम या ज्यादा होना – Hypotension or Hypertension
  • ह्रदय की धडकन का तेज़ या धीमा होना – Tachycardia or bradycardia
  • हृदय में असामान्य ध्वनि का पाया जाना – Heart murmurs
  • मरीज़ का अपने हाथों की हथेली या मुट्ठी से सीने को दबाना या मसलना, इसे Levine’s Sign कहते हैं|(Pressing or squeezing chest with palm or fist)
  • मरीज़ का बेचैन दिखना – Restlessness
  • चेतना का कम हो जाना – Drowsiness
blood pressure
blood pressure

ये सारे परिणाम (findings) या संकेत (sign)शारीरक परीक्षण में मिल सकते हैं जो दिल का दौरा की तरफ इशारा करते हैं|

अगर परीक्षक के हाथो के सीने में लगने या दबाने (Palpation) से दर्द बढ़ता है या दोबारा शुरू हो जाता है तो ऐसा दर्द दिल का दौरा कि वजह से है इसकी सम्भावना कम हो जाती है |

3.दिल का दौरा में चिकित्सीय जाँच – Medical tests in Heart attack in Hindi

  • दिल का दौरा में किये जाने वाले जाँच –

१. इलेक्ट्रोकार्डिओग्राम – Electrocardiogram (ECG)

  • दिल के दौरे का निदान के लिए किया गया ये सबसे पहला परीक्षण होता है|
  • इसमें आपके ह्रदय की विद्दुत गतिविधि को एक पेपर पर रिकॉर्ड किया जाता है |
  • घायल ह्रदय कि मश्पेशियाँ सामान्य रूप से विद्युत् आवेगों (Electrical impulses) का सञ्चालन(conduct) नहीं करती हैं |
  • ECG दिखा सकता है कि दिल का दौरा पड़ा है या परगति में है |
HEART ATTACK
ECG OF A PATIENT WITH COMPLAIN CHEST PAIN AND SWEATING

2.खून कि जाँच – Blood test in heart attack in Hindi

A. कार्डिएक एंजाइम – Cardiac enzymes
ट्रोपोनिनआई और टी – Troponin I and T
  • ह्रदय में कुछ घात होता है तो ये खास एंजाइम हृदय की मांशपेशियो से निकल कर खून में शामिल हो जाते हैं|
  • इन एंजाइम का खून में एक मात्रा से ज्यादा पाया जाना हार्ट अटैक या angina का संकेत होता है|

NOTE-इन एंजाइम का खून में एक मात्रा से ज्यादा पाया जाना , हार्ट अटैक और एनजाइना के अलावा दूसरी गैर ह्रदय सम्बन्धी बिमारियों मे भी मिलता है|जैसे – बहुत ज्यादा संकर्मण (Severe infection) या गुर्दे की बीमारी(kidney disease) आदि में|

सी के-एम बी – CK-MB (creatine kinase myocardial band)-
  • इस एंजाइम का भी खून में एक मात्रा से ज्यादा पाया जाना हार्ट अटैक या एंजाइना का संकेत होता है|

NOTE – CKMB ह्रदय सम्बंधित बीमारी के अलावा अस्थमा और मांसपेशियों के अतिघात (severe musculoskeletal damage) में ज्यादा मात्रा में पाया जाता है|

इसके अलावा कंप्लीट ब्लड काउंट, लिवर फंक्शन टेस्ट, पनक्रिएटिक एंजाइम भी हार्ट अटैक  के निदान में अहम् साबित होते हैं |

3. सीने का एक्स-रे – Chest X-ray

  • आपका डॉक्टर ह्रदय का आकर, रक्त कोशिकाएं और फेफड़ो में जमा पानी को देखने के लिए एक्स-रे करवाने के लिए कह सकता है |

4. इकोकार्डियोग्राफी – Echo-Cardiography

  • ये जाँच ऐसे मरीजों में काफी अहम् साबित होता जिनको पहले से कोई ह्रदय सम्बंधित बीमारी रहती है|
  • ये जाँच आपके ह्रदय का विडियो चित्र दिखाता है ,इस जाँच के द्वारा ये पता चलता है कि ह्रदय का कौन सा हिस्सा घायल हुआ है |
  • इससे ये भी पता चलता है कि हार्ट का फंक्शन सही है या नहीं |

इनके अलावा कुछ खास किस्म के जाँच और होते हैं जो किये जा सकते हैं, ये जाँचे बीमारी कि तीव्रता पर निर्भर करती हैं ,जैसे-

1.ऐन्जिओग्राम – Coronary Catheterization (Angiogram/Angiography )

  • यह एक ऐसा परीक्षण है जिसमें आपके दिल की रक्त वाहिकाओं को देखने के लिए एक्स – रे का उपयोग किया जाता है |
  • परीक्षण आमतौर पर ये देखने के लिया किया जाता है, कि ह्रदय के रक्त प्रवाह में कोई रुकावट या कमी तो नही , और है तो कितना है (प्रतिशत में)|

2.एक्सरसाइज स्ट्रेस टेस्ट – Exercise stress test

  • इस जाँच के ज़रिये देखा जाता है कि शारीरिक गतिविधि के दौरान आपका दिल कैसे काम करता है|
  • क्यूंकि व्यायाम आपके ह्रदय पंप को कठिन और तेज़ बनाता है,ये जाँच आपके ह्रदय के भीतर रक्त के प्रवाह की समस्या को प्रकट कर सकता है |
  • इस परीक्षण में आमतौर पर ट्रैडमिल पर चलते हुए आपके ह्रदय की लय ,रक्तचाप ,और साँस कि निगरानी की जाती है |

3.कार्डियक सीटी स्कैन और ऍम आर आई – Cardiac CT scan and MRI

  • कार्डियक सीटी स्कैन और ऍम आर आई के ज़रिये भी ह्रदय की रक्त वाहिकाओं में रुकावट और ह्रदय में घात को देखा जाता है |

हार्ट अटैक का इलाज क्या है – Heart attack treatment in Hindi

हार्ट अटैक का इलाज और बचाव का तरीका :-

तत्काल इलाज – Emergency treatment of heart attack

अगर आपके डॉक्टर को ये लगता है कि आपको दिल का दौरा पड़ा है तो वो तत्काल में निम्न दवाओं से आपका इलाज करेगा |

  • रक्त के जमाव को रोकने की दवा जैसे –Asprin
  • छाती का दर्द कम करने और ह्रदय में रक्त प्रवाह बढ़ाने की दवा जैसे – Nitroglycerine
  • ऑक्सीजन से
  • दिल का दौरा कि पुष्टि के बाद आपका डॉक्टर हार्ट अटैक के प्रकार के हिसाब से आपका इलाज करेगा|

आपका इलाज आपके लक्षण के समय पर भी निर्भर करता है कि आपको दिल का दौरा का लक्षण कितने घंटो या दिनों से है जैसे –

  • अगर आपको दिल का दौरा के लक्षण १२ घंटे या उससे कम समय से है तो आपका इलाज खून का थक्का तोड़ने वाली दवा से किया जा सकता है |
  • ऐसी दवाओ को थ्रोम्बोलिटिक ड्रग्स (Thrombolytic drugs) कहते है और इस परक्रिया को थ्रोम्बोलाइजेशन (Thrombolysation) कहा जाता है |
  • यदि आपको लक्षण १२ घंटो से ज्यादा समय से है तो आपका इलाज ऐन्जिओग्राम (Angiogram) के बाद तय होता है |
  • ऐन्जिओग्राम के रिपोर्ट के अनुसार आपका इलाज दवाओं से ,इंजेक्शन से, स्टंट डालकर या फिर बाईपास सर्जरी (Bypass surgery) से किया जा सकता है|

दवाओं से इलाज – Heart attack treatment with medicine in Hindi

हार्ट अटैक में उपयोग होने वाली दवाएं :- Medicine used in heart attack

  • खून के थक्के को तोड़ने की दवाएं(Clot busters) |
  • रक्त चाप को नियंत्रित करने और ह्रदय के रक्त प्रवाह को बढ़ाने की दवाएं |
  • रक्त को पतला रखनी वाली दवाएं जिससे कि रक्त संकरी रक्त वाहिकाओं में आसानी से प्रवाह कर सके (Blood thinners/anti platelet drugs)|
  • ऐसी दवाएं जो रक्त में मौजूद ख़राब cholesterol कि मात्रा को नियंत्रित रखे (Statins)|
Heart Cholesteral in human illustration
Heart Cholesteral in human illustration

Note -किसी भी दवा के इस्तेमाल से पहले डॉक्टर कि सलाह ज़रूर लें |

ज़रूर पढ़ें – हार्ट अटैक के बाद क्या खाएं क्या ना खाएं -बेस्ट डाइट चार्ट

ज़रूर पढ़ें – हार्ट अटैक सम्बंधित सीने के दर्द और सामन्य सीने के दर्द में फर्क़

जानें :- अनिद्रा (इनसोम्निया) या नींद ना आने का कारण और इलाज – Insomnia in Hindi

शल्य क्रिया से इलाज – Surgical treatment of heart attack in hindi

1. बाईपास सर्जरी – Bypass Surgery(CABG/GRAFTING)-

  • इस शल्य क्रिया में बदन के दुसरे हिस्से से रक्त वाहिका को लेकर उसे अवरुद्ध धमनी(blocked artery) में जोड़(grafting) देते हैं|

2. एंजियोप्लास्टी – Percutaneous transluminal coronary angioplasty/PTCA/PCI(Stent placement) –

  • ये एक प्रमुख ह्रदय सम्बंधित शल्य क्रिया है जिसमे अवरुद्ध धमनी(blocked artery) में स्प्रिंग (स्टंट) डालकर उसमे रक्त प्रवाह को नियमित किया जाता है |

Note -जब भी आपको ये अंदेशा हो कि आपको दिल का दौरा पड़ सकता है या पड़ चुका है तो तुरंत Emergency में डॉक्टर से परामर्श करें |

हार्ट अटैक से कैसे बचें – Prevention from Heart attack in Hindi

दिल का दौरा से बचने का तरीका इस प्रकार है :

  1. हार्ट अटैक (Heart attack) से बचाव के लिए सबसे ज़रूरी है कि आप लगातार अपने डॉक्टर से परामर्श लेते रहें |
  2. इसके अलावा जीवन शैली में बदलाव लाकर दिल का दौरा से बचाव संभव है ,जैसे –
  • खाने में वसा युक्त भोजन (FAT RICH FOOD) का इस्तेमाल कम करना|जैसे-रेड मीट,तली हुयी चीजें (fried food),पेस्ट्रीज और केक आदि|(हार्ट के मरीज़ के लिए डाइट चार्ट )
  • फाइबर युक्त भोजन(FIBER RICH FOOD )का ज्यादा इस्तेमाल करना|
  • खाने में नमक का इस्तेमाल कम करना |
  • ताज़ी और हरी सब्जियों का इस्तेमाल ज्यादा करना |(हार्ट अटैक के बाद क्या खाएं ?..)
  • रोजाना कसरत(EXERCISE) करना कम से कम ३० मिनट|
  • बीडी या सिगरेट का इस्तेमाल न करना या बंद करना |
  • खुद को तनाव मुक्त(STRESS FREE) रखना |
heart healthy diet

ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और शुगर को नियंतरण में रखना और लगातार डॉक्टर के संपर्क में रहना हार्ट अटैक से बचने के लिए बहुत ज़रूरी है |

पारिवारिक इतिहास(FAMILY HISTORY) में अगर किसी को ह्रदय सम्बंधित बीमारी थी तो पहले से ही बचाव करना|

अगला टॉपिक – हार्ट अटैक के बाद क्या खायें क्या नहीं ये जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

जानें :- अनिद्रा (इनसोम्निया) या नींद ना आने का कारण और इलाज – Insomnia in Hindi

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